उत्तराखंड के मतदाता आज 55 उम्मीदवारों के भविष्य का करेंगे फैसला, सांसद चुनने के साथ मतदान प्रतिशत बढ़ाने की भी बड़ी जिम्मेदारी।

देहरादून – देश की सबसे बड़ी पंचायत के लिए उत्तराखंड के मतदाता अपने ‘पांच पंचों’ को चुनकर भेजेंगे। राज्य के करीब 83 लाख मतदाता हर लिहाज से अहम हैं, क्योंकि 18वीं लोकसभा के गठन के लिए पहले चरण में शामिल मतदाताओं का मूड अगले छह चरणों में चुनावी माहौल बनाएगा। राज्य के मतदाता विधानसभा चुनाव के बाद करीब 25 महीने बाद बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं।

पांचों लोकसभा सीट जिसमें गढ़वाल मंडल की हरिद्वार, गढ़वाल और टिहरी के साथ कुमाऊं मंडल की नैनीताल-ऊधमसिंह नगर और सुरक्षित सीट अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के मतदाताओं पर इस बार अपना सांसद चुनने के साथ मतदान प्रतिशत बढ़ाने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। उत्तराखंड से इस बार 75 फीसदी मतदान की आस है। 55 उम्मीदवारों की करीब 22 दिनों की कड़ी मेहनत, भागदौड़ और खुद को बेहतर साबित करने की होड़ के बाद उन्हें परखने का दिन है।

अच्छे नंबरों से पास हुआ दूर का वोटर, घरों से नहीं निकला वोट

इस चुनाव में राज्य के सर्विस वोटर की रिकार्ड भागीदारी दिखी। राज्य के करीब 93 हजार सर्विस वोट में करीब 90 हजार ने अपने मत का प्रयोग किया, जबकि घरों से वोट लाने की प्रक्रिया सिरे से परवान नहीं चढ़ी। चुनाव आयोग ने इस बार दिव्यांग और 85 साल से ऊपर के मतदाताओं के घर पहुंचकर उनके वोट पड़वाने की तैयारी की थी, लेकिन इसके नतीजे बहुत निराश करने वाले रहे। राज्य के करीब 80 हजार से अधिक दिव्यांग मतदाताओं में बमुश्किल तीन हजार लोग ही मतदान को तैयार हुए। वहीं, 85 की उम्र पार कर चुके करीब 65 हजार मतदाताओं में 9,400 लोग ही घर बैठकर मतदान करने को तैयार हुए। ऐसे में राज्य के अन्य मतदाताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, ताकि मतदान प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। साथ ही दिव्यांग और बुजुर्ग श्रेणी के शेष मतदाताओं को भी बूथ तक लाकर उनका वोट प्रतिशत भी बढ़ाने की जरूरत है।

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