Vision 2020 Exclusive- इस वर्ष ऋणात्मक रूप से 71 फीसदी बर्फबारी कम हुई है: विक्रम सिंह, निदेशक मौसम विभाग, देहरादून!

कम बारिश और बर्फबारी से फसलें प्रभावित होती है: कृषि निदेशक गौरीशंकर

देहरादून। वैश्विक गर्मी का असर उत्तराखंड पर हो रहा है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। 2015 के बाद लगातार बारिश और बर्फबारी में कमी आयी है, इसका प्रभाव उत्तराखंड में फसलों पर होना सहज ही है। मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह मानते हैं कि 2015 के बाद 2016 में माइनस 76 प्रतिशत वर्षा हुई थी जबकि इस वर्ष अब तक माइनस 71 प्रतिशत वर्षा हुई है। लगातार बारिश का कम होना उत्तराखंड के लिए उचित नहीं है। मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह मानतें है कि 3000 मीटर वाले ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी तो हुई है पर वह पहले की तुलना में कम हुई है। यह क्रम 2015 के बाद प्रारंभ हुआ है, जिसका प्रभाव मौसम तथा फसलों पर पड़ता ही है। मौसम विभाग द्वारा बर्फ की माप के लिए मुक्तेश्वर में एक केंद्र बनाया गया है।

पिछले साल वहां बर्फबारी न के बराबर हुई थी और इस साल 2-3 इंच तक बर्फबारी हुई है, जो इस बात का संकेत है कि इनसे मौसमी फसलों में भी कमी आती है, इसी बात को कृषि निदेशक गौरीशंकर भी स्वीकारते हैं। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में वैसे भी कृषि क्षेत्रफल कम है किन्तु वर्षा यहां की खेती को अधिक प्रभावित करती है। बारिश कम होने से फसलों पर प्रभाव निश्चित रूप से पड़ता है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां की कृषि बारिश के भरोसे रहती है। ऐसे में फसलों पर फर्क पड़ना सहज है। कृषि निदेशक का कहना है कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई का प्रबंध् है, वहां को छोड़ दिया जाए तो शेष क्षेत्रों में कृषि निश्चित रूप से प्रभावित हुई है। गौरीशंकर मानते हैं कि फसलों के साथ-साथ वर्षा और बर्फबारी का फलों पर भी अच्छा-खास प्रभाव पड़ता है। कम बारिश तथा बर्फबारी से सेब तथा उस प्रजाति के फल प्रभावित होते हैं। वे मानते हैं कि साल यदि और अधिक बारिश न हुई तो कृषि तथा फलों पर अच्छा-खास प्रभाव पड़ेगा। किसान भी इस कम बारिश से प्रभावित होगा।

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