देहरादून: आज 26 जनवरी 2026 को देशभर में गणतंत्र दिवस धूम धाम से मनाया जा रहा है। उत्तराखंड में भी आज गणतंत्र दिवस पर विशेष धूम देखने को मिल रही है। CM पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर तो राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लोकभवन में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। साथ ही संविधान की उद्देशिका की शपथ भी दिलाई।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लोकभावन में फहराया राष्ट्रीय ध्वज
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लोकभावन में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर प्रदेश वासियों को 77 वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। राज्यपाल ने कहा कि गणतंत्र दिवस देश के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि ये अमृत काल के संकल्पों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर राज्यपाल ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नए आयाम छू रहा: राज्यपाल
इसके साथ ही राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नए आयाम छू रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष तकनीक, हरित ऊर्जा और सैन्य क्षमता जैसे क्षेत्रों में देश ने वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों के चलते भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री धामी ने दी गणतंत्र दिवस की बधाइयाँ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम आवास पर सुबह 9 बजे ध्वजारोहण किया। जिसके बाद उन्होंने मौजूद सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनों को संविधान की उद्देशिका की सपथ दिलाई। मुख्यमंत्री धामी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, संविधान निर्माताओं एवं राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे संविधान निर्माण का महापर्व है।
संविधान के आदर्शों का पालन हमारी जिम्मेदारी
साथ ही ये अवसर हमें स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने और अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा भी देता है। हम सब की जिम्मेदारी है कि संविधान के उद्देश्यों के अनुरूप न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के मूलभूत लोकतांत्रिक आदर्शों का सदैव पालन करें। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “विकसित भारत २०४७” के सपने के साथ-साथ हम 2047 तक विकसित और “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।



