चमोली: उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में पैनखंडा समुदाय ने केंद्रीय आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। समुदाय के लोगों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों के समर्थन में ज्योतिर्मठ में एक विशाल जुलूस निकालकर केंद्र सरकार से उन्हें केंद्रीय आरक्षण सूची में शामिल करने की मांग की।
केंद्रीय आरक्षण नहीं मिलने से युवाओं में रोष
पैनखंडा समुदाय के लोगों का कहना है कि वर्ष 2017 में राज्य सरकार द्वारा उन्हें राज्य की आरक्षण सूची में शामिल किया गया था, लेकिन अब तक केंद्रीय सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य सूची में शामिल होने के बावजूद केंद्रीय सूची में नाम न होने के कारण समुदाय के युवाओं को अखिल भारतीय स्तर की नौकरियों और शैक्षणिक अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे वर्षों से अपनी भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के माध्यम से समुदाय ने सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है, जिससे सीमांत क्षेत्र के लोगों को समान अवसर मिल सकें।
कौन है पैनखंडा समुदाय?
पैनखंडा समुदाय उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में निवास करने वाला एक पिछड़ा वर्ग समुदाय है। चमोली जिले के ज्योतिर्मठ ब्लॉक में इस समुदाय के लोग करीब 58 गांवों में रहते हैं। राज्य स्तर पर पैनखंडा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत लगभग 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन उनकी मांग है कि उन्हें केंद्रीय नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में भी यही सुविधा दी जाए। समुदाय का कहना है कि केंद्रीय आरक्षण मिलने से उनके युवाओं को देशभर में रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।


