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गंगोत्री में दर्शन से पहले पंचगव्य अनिवार्य? गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर छिड़ी बहस, 24 मार्च को होगा फैसला

UTTARKASHI NEWS: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत होने वाली है, लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही नया विवाद खड़ा हो गया है. केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रही बहस के बीच अब गंगोत्री मंदिर समिति की तरफ से भी बड़ा बयान सामने आया है. समिति के मुताबिक, गंगोत्री धाम में दर्शन से पहले गैर-हिंदुओं को पंचगव्य ग्रहण करना अनिवार्य किया जा सकता है. वहीं, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के एफिडेविट वाले प्रस्ताव को गंगोत्री समिति ने व्यक्तिगत राय बताया है.

BKTC के बाद गंगोत्री मंदिर समिति गैर हिन्दुओं के प्रवेश पर सख्त 

चारधाम यात्रा से पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने अपने अधीन आने वाले दोनों प्रमुख धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए एफिडेविट व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है. इसके विपरीत, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम का संचालन करने वाली चारधाम महापंचायत ने अलग रास्ता अपनाते हुए नई व्यवस्था की घोषणा की है.

जाँच कमेटी की रिपोर्ट के बाद होगा फैसला 

गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव और चारधाम महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल के मुताबिक, गैर-सनातनियों के प्रवेश पर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है. ये कमेटी अगले 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद स्पष्ट किया जाएगा कि किस प्रकार से नियम लागू किए जाएंगे. साथ ही, धार्मिक आधार पर भी इस व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.

गंगोत्री धाम में दर्शन से पहले पंचगव्य ग्रहण हो सकता है जरुरी 

जहाँ एक ओर BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के आस्था के शपथ पात्र वाले बयान से एक नई बहस छिड गई थी. इसके बाद अब गंगोत्री मंदिर समिति का कहना है कि गंगोत्री धाम में दर्शन से पहले पंचगव्य ग्रहण करने की व्यवस्था की जाएगी. जो श्रद्धालु इसे स्वीकार करेगा, उसे सनातन परंपरा में आस्था रखने वाला माना जा सकता है.

क्या होता है पंचगव्य 

पंचगव्य एक पारंपरिक धार्मिक मिश्रण है, जिसमें गाय से प्राप्त पांच तत्व—दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर शामिल होते हैं. इसे वैदिक विधि से तैयार किया जाता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है. कई मान्यताओं के मुताबिक, इसमें गंगाजल और शहद का भी उपयोग किया जाता है. हिंदू धर्म में इसका उपयोग शुद्धिकरण, यज्ञ और पूजा-पाठ में किया जाता है. आयुर्वेद में भी इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है, जबकि जैविक खेती में यह उर्वरक के रूप में इस्तेमाल होता है.

गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव ने कहा कि 

गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव और चार धाम पंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि जो व्यक्ति गाय को पूजनीय मानता है और पंचगव्य का आचमन करता है, उसे सनातन परंपरा से जुड़ा माना जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध सभी सनातन परंपरा का हिस्सा हैं। अन्य धर्मों के लोग यदि पंचगव्य ग्रहण करते हैं, तो यह उनके लिए “घर वापसी” का अवसर भी हो सकता है.

यमुनोत्री मंदिर समिति ने भी दिए संकेत 

यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने भी संकेत दिए हैं कि उनकी समिति गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध के पक्ष में है. हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय चैत्र शुक्ल षष्ठी के दिन लिया जाएगा, जब मां यमुना के अवतरण दिवस के मौके पर कपाट खुलने की तिथि और नियमों की घोषणा होगी.

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