विज़न 2020 न्यूज: वैसे तो सरकार प्रदेश में ग्रामीण बच्चों की शिक्षा पर करोड़ों खर्च करने का दावा कर रही लेकिन चंपावत का एक ऐसा स्कूल है जो सरकार के इन सारे दावों को खोखला साबित कर रही है। दरअसल चंपावत तल्लादेश के बरकुम का प्राइमरी स्कूल तीन माह से छतविहीन है। इस स्कूल की छत 29 मई को आंधी-तूफान में उड़ गई थी, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक छत बनवाने के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की , शिक्षकों को बारिश आने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती जिससे नौनिहालों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।शिक्षकों और ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन से इस बारे में बात की गई लेकिन मामला जस का तस बना हुआ है। बहरहाल ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का स्तर बढ़ने का दावा करने वाली सरकार को एक बार इस स्कूल की हालत पर गौर जरुर फरमाना चाहिए।कैसे मिलेगी शिक्षा?
विज़न 2020 न्यूज: वैसे तो सरकार प्रदेश में ग्रामीण बच्चों की शिक्षा पर करोड़ों खर्च करने का दावा कर रही लेकिन चंपावत का एक ऐसा स्कूल है जो सरकार के इन सारे दावों को खोखला साबित कर रही है। दरअसल चंपावत तल्लादेश के बरकुम का प्राइमरी स्कूल तीन माह से छतविहीन है। इस स्कूल की छत 29 मई को आंधी-तूफान में उड़ गई थी, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने अब तक छत बनवाने के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की , शिक्षकों को बारिश आने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती जिससे नौनिहालों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।शिक्षकों और ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन से इस बारे में बात की गई लेकिन मामला जस का तस बना हुआ है। बहरहाल ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का स्तर बढ़ने का दावा करने वाली सरकार को एक बार इस स्कूल की हालत पर गौर जरुर फरमाना चाहिए।RELATED ARTICLES