Monday, March 9, 2026
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भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं लोककला की फोटो गैलरी का अवलोकन,

भराड़ीसैंण: उत्तराखण्ड विधानसभा भवन में आज राज्यपाल के अभिभाषण के बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने अध्यक्ष विधानसभा ऋतु खण्डूडी भूषण, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्य सरकार के कई मंत्रीगण, विधायकगण एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधानसभा परिसर में नवनिर्मित उत्तराखण्ड की संस्कृति और लोककला पर आधारित पेंटिंग गैलरी का अवलोकन किया गया।

भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में नवनिर्मित पेंटिंग का राज्यपाल ने किया अवलोकन 

इस गैलरी में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण के विशेष प्रयासों से उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति को दर्शाती 70 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से रम्माण के पारंपरिक मुखौटे, नंदा राजजात यात्रा, रम्माण पेंटिंग, छोलिया नृत्य, ऐपन कला, पारंपरिक आभूषण तथा लोक वाद्य यंत्रों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।

गैलरी में 70 से अधिक पेंटिंग्स की लगी है प्रदर्शनी 

इन सभी पेंटिंग्स को प्रदेश के ही प्रतिभाशाली कलाकारों मुकुल बड़ूनी, ज्योति जोशी एवं मोहनलाल द्वारा तैयार किया गया है, जिनकी कला के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

 

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण से जब इस पहल के विषय में पूछा गया, तो उन्होंने कहा—
“किसी भी राष्ट्र या प्रदेश की आत्मा उसकी संस्कृति होती है। यदि किसी राष्ट्र या प्रदेश को जीवित रखना है और उसे निरंतर आगे बढ़ाना है, तो उसकी संस्कृति को बचाने और उसे आगे बढ़ाने के प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए।            मैंने भी इसी भावना के साथ कार्य किया है। वर्ष 2022 से लगातार उत्तराखण्ड की संस्कृति और लोककला को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हूँ।   – ऋतु खण्डूडी भूषण

विधानसभा अध्यक्ष ने कलाकारों की मेहनत को सराहा 

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि, जब भी उन्हें देश के किसी बड़े व्यक्तित्व से मिलने का अवसर मिलता है, तो वो उन्हें ऐपण कला से बने शॉल, हमारे प्रसिद्ध रम्माण के मुखौटे अथवा हमारे पहाड़ी उत्पाद भेंट करती हैं। अक्सर लोग इन उपहारों के बारे में जिज्ञासा से पूछते हैं, तब मुझे उन्हें उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और लोककलाओं के बारे में बताने का अवसर मिलता है। इससे हमारी लोककलाओं का प्रचार-प्रसार होता है और अधिक लोग इनके बारे में जान पाते हैं।

साथ ही मैं यह भी सुनिश्चित करती हूँ कि ये सभी वस्तुएँ हमारे प्रदेश के स्थानीय कलाकारों से ही बनवाई जाएँ, ताकि उन्हें रोजगार मिले और उनकी कला को आगे बढ़ने का अवसर भी प्राप्त हो। इस प्रकार संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ कलाकारों और किसानों के जीवन को सशक्त बनाने का प्रयास भी निरंतर जारी है।”

 

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