देहरादून- उत्तराखंड में वाहन की प्रदूषण जांच नहीं कराना अब महंगा पड़ सकता है। एक नवंबर से वाहन प्रदूषण पर जुर्माना बढ़ जाएगा। वाहन के प्रदूषण फैलाने पर पहली बार में 2500 और दूसरी बार में 5000 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र नहीं होने पर पांच सौ रुपये का जुर्माना लगेगा।
केंद्र सरकार ने नए एमवी ऐक्ट में यातायात नियम तोड़ने पर जुर्माने की दरें दस गुना तक बढ़ाई हैं। राज्य सरकार ने कुछ मामलों में दरें कम की हैं। वाहन के प्रदूषण फैलाने पर केंद्र ने दस हजार रुपये जुर्माना तय किया था, जिस राज्य सरकार ने घटाकर पहली बार में 2500 रुपये और दूसरी बार में 5000 हजार रुपये किया है। नई दरें सितंबर माह में लागू हो गई थीं, लेकिन प्रदूषण पर नए जुर्माने में एक नवंबर तक छूट दी गई थी। क्योंकि प्रदेश में प्रदूषण जांच केंद्रों की संख्या सीमित थी। प्रदेश में 27 लाख चौपहिया और दुपहिया वाहन पंजीकृत हैं। परिवहन विभाग का मानना है इसमें करीब 25 लाख वाहन सड़क पर चल रहे हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ साढ़े छह लाख वाहनों की प्रदूषण जांच हुई है। नया ऐक्ट लागू होने के बाद सितंबर माह में चार लाख वाहनों की जांच हुई। जबकि अक्तूबर माह में अभी तक दो लाख वाहनों की जांच हुई है। 50 हजार वाहनों की जांच पहले हो चुकी है।
वाहन के प्रदूषण फैलाने पर अभी तक एक हजार रुपये जुर्माना है। जबकि प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र नहीं होने पर 100 रुपये जुर्माना है। पुराने वाहनों की प्रदूषण जांच छह माह और नये वाहनों की एक साल में करवानी होती है। शुक्रवार से नई दरें लागू हो जाएंगी। सुनीता सिंह, अपर परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड ने बताया कि प्रदेश में जुर्माने की नई दरें सिंबतर अंतिम सप्ताह में लागू हो गई थी, लेकिन लोगों की सुविधा के लिए प्रदूषण पर लगने वाले जुर्मान में एक नवंबरतक छूट दी गई थी। अब एक नवंबर से नई दरें लागू हो जाएंगी।



