देहरादून- त्रिवेंद्र सरकार की कड़ी मेहनत अब रंग लाने जा रही है। निवेश के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड इन्वेस्टर को काफी लुभा रहा है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद प्रदेश में निवेश के साथ रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। समिट के केवल 10 माह की अवधि में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे लगभग 45 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 11 हजार से अधिक उद्यमों की स्थापना प्रदेश में हुई है, इनमें लगभग 80 हजार लोगों को रोजगार मिला। वर्ष 2018 में हुई इन्वेस्टर्स समिट के सकारात्मक नतीजे आने शुरू हो गए हैं।
त्रिवेंद्र सरकार ने करीबन एक साल पहले प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार और पलायन जैसे महत्वपूर्ण विषय को साधते हुए इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया था। निवेशकों को लुभाने और राज्य में कंपनियों को बुलाने के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने एड़ी चोटी का जोर लगाया था। 8 और 9 अक्टूबर को हुए इस दो दिवसीय समिट में उत्तराखंड सरकार ने निवेशकों के साथ 1 लाख 24 करोड़ रुपए के 601 प्रस्तावों पर करार किया था। जिसमें 601 एमओयू साइन किए गए थे। समिट के एक साल बीतने के बाद इसका अच्छा खासा रिस्पांस देखने को मिल रहा है। केवल एमओयू वाले ही नहीं बल्कि समिट के बाद बने माहौल के चलते भी कई अन्य निवेशक भी उत्तराखंड की ओर आकर्षित हो रहे हैं। समिट का अब तक का स्टेटस काफी अच्छा है। अब तक राज्य में 17 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की ग्राउंडिंग हो चुकी है। वहीं उद्योग निदेशक ने बताया कि पूरे देश में उत्तराखंड इन्वेस्टर समिट की ग्राउंडिंग सक्सेस रेट सबसे ज्यादा है। उत्तराखंड में विदेशी निवेश भी काफी देखने को मिल रहा है। जिसकी सबसे बड़ी वजह उत्तराखंड के प्राकृतिक स्रोत और यहां की आबोहवा हैं। उन्होंने कहा कि वैलनेस के क्षेत्र में उत्तराखंड एक विश्वविख्यात हब बनने जा रहा है।उद्योग सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि उत्तराखंड में ग्राउंडिंग हुए प्रोजेक्ट का आउटपुट अगले 1 से 2 साल में सबके सामने होगा।
उत्तराखंड में इन क्षेत्रों में आया है निवेश
उत्तराखंड में हुए इन्वेस्टर समिट के बाद अब तक तकरीबन 17 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट अपने पहले चरण को पूरा कर चुके हैं। इनमें से कई कंपनियों ने अपना काम शुरू भी कर दिया है। जिसका आउटपुट आने वाले 1 साल में हम सबके सामने होगा। बहरहाल अगर बात करें अब तक आए 17 हजार करोड़ रुपए के निवेश की तो राज्य में ऊर्जा, पर्यटन जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ जिला स्तर पर छोटे उद्योग और कई आईआईटी डायरेक्ट बिडिंग के माध्यम से आ चुके हैं। तो वहीं कई ऐसे प्रोजेक्ट भी हैं जिन पर एमओयू साइन नहीं हुआ था लेकिन राज्य में इन्वेस्टर समिट के बाद बने माहौल के चलते निवेशक यहां खिंचे चले आए हैं।
इन्वेस्टर्स समिट के बाद अब तक पर्यटन, ऊर्जा सहित तमाम राज्य स्तरीय बड़े शब्दों में 13000 करोड़ के 102 प्रोजेक्ट आ चुके हैं। जिनमें 30,000 से ज्यादा रोजगार की उम्मीद की जा रही है। इसके बाद जिला स्तरीय छोटे उद्योग जिसमें एमएसएमई सेक्टर के 976 करोड़ के 245 प्रोजेक्ट आज की तारीख में ग्राउंडेड हो चुके हैं। जिनमें 10 हजार से ज्यादा रोजगार की उम्मीद की जा रही है। डायरेक्ट बिड के माध्यम से राज्य में 895 करोड़ के तीन आईटीआई आज की तारीख में ग्रोउंडेड यानी निर्माण का पहला चरण पूरा कर चुके हैं। अगर बात करें इन्वेस्टर सम्मिट के बाद आए निवेशकों की तो 16 सौ करोड़ के 30 ऐसे प्रोजेक्ट आए हैं जिन पर एमओयू साइन नहीं किया गया था लेकिन निवेशकों द्वारा उत्तराखंड में रुचि दिखाते हुए निवेश के लिए पहले चरण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है । इन 23 नए प्रोजेक्ट से 3 हजार से ज्यादा रोजगार की उम्मीद की जा रही है। इस तरह से अगर कुल मिलाकर देखें तो सभी सेक्टरों में तकरीबन 17 हजार करोड़ से ज्यादा की कीमत के 373 प्रोजेक्ट आ चुके हैं। जिनके जरिए अनुमान लगाया जा रहा है कि 45 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। जिसके परिणाम निकट भविष्य में देखने को मिलेंगे।