देहरादून- मसूरी में रविवार से हिमालयन कॉन्क्लेव आयोजित होगा। जिसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्री हिमालयी राज्यों से जुडे़ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके लिए आज से ही मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि देहरादून पहुंचने लगेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मसूरी में आयोजित हो रहे हिमालयन कॉन्क्लेव में हिमालयी राज्यों से जुडे़ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। हिमालयी राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संचय, जल संरक्षण की मुहिम को भी आगे बढ़ाएंगे। पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर भी विचार विमर्श किया जाएगा। वन अधिनियम एवं वन क्षेत्र की अधिकता जैसे समान ज्वलंत समस्याएं भी इस सम्मेलन का हिस्सा रहेगी। सभी राज्यों के कॉमन एजेंडा पर भी सम्मेलन में चर्चा होगी। प्लेट मूवमेंट और मौसम में बदलाव के कारण उत्तराखंड सहित अन्य हिमालयी राज्य अब भूकंप, भूस्खलन, अतिवृष्टि जैसी आपदाओं की और अधिक मार सहन कर रहे हैं। आपदाओं से निपटने के लिए सभी राज्यों के सामने एक मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र को विकसित करने की चुनौती है। मसूरी में आयोजित हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सामने उत्तराखंड ने इसी चुनौती से पार पाने के लिए साथ आने का सुझाव पेश करने की तैयारी की है।इसके साथ ही नदियों, ग्लेशियर, झीलों व जल स्त्रोतों को संरक्षित करने के साथ ही सूख चुकी नदियों व जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने पर भी फोकस रहेगा। भारत की अधिकांश नदियों का स्रोत हिमालय है। इसलिए प्रधानमंत्री के जल संचय अभियान में हिमालयी राज्यों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। 11 हिमालयी राज्य किस प्रकार जल संरक्षण में केंद्र सरकार का सहयोग कर सकते हैं, इस पर भी मंथन किया जाएगा।



