देहरादून- उत्तराखंड में शीतकाल के दौरान भारी बर्फबारी के बाद अब पहाड़ों पर तपिश बढ़ने से फिर से आपत आ गई है । तापमान बढ़ने के साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। कुमाऊं में फायर सीजन के बाद से करीब 40 हेक्टेयर जंगल को नुकसान हो चुका है। कई हेक्टेयर में पौधरोपण भी प्रभावित हुआ है। इसी क्रम में रानीखेत तहसील के सुदूरवर्ती बबुरखोला के जंगल में आग लगने से बड़ी संख्या में वनस्पति और जंगल को नुकसान पहुंचा है । सोमवार को आलम यह था कि आग आवासीय क्षेत्र में पहुंचने की ओर आगे बढ़ी तो ग्रामीणों को आगे आकर अपने घरों को बचाना पड़ा । विभागीय सूचनाओं के अनुसार प्रदेश में आग लगने की कुल 70 घटनाएं हो चुकी है। इसमें गढ़वाल और कुमाऊं में 32-32 और वन्यजीव क्षेत्र में छह घटनाएं हो चुकी है। इसमें कुमाऊं में करीब 40 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंच चुका है। साथ ही करीब चार हेक्टेयर प्लांटेशन वाला क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। विदित हो कि उत्तराखंड के जंगलों में गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इस सब के बीच सल्ट ब्लॉक के कालीगांव, जाललीखानी, कालीगांव, अटरिया समेत दर्जन भर गांवों के जंगलों में आग लगी है । कालीगांव के जंगल में लगी आग के चलते BSNL की OFC लाइन जल गई, जिसके चलते सल्ट के सभी सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप रहा। पिछले दो दिनों से लगी आग पर काबू पाने के लिए वन रक्षकों को भेजा गया है। इसी क्रम में चंपावत जिले में नेपाल सीमा से लगे तरकुली के जंगलों में आग लगने की खबरें हैं। वहीं भिकियासैंण में लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस के पीछे के तरफ के जंगल में आग लग गई जिसने विकराल रूप धारण कर लिया। आग पाड़ीकोट होते हुए कन्या इंटर कॉलेज के पास तक फैल गई। कनालीछीना (पिथौरागढ़) ब्लॉक के गुड़ौली गांव के चीड़ के जंगलों में भी आग लग गई। आबादी की ओर बढ़ रही आग को गांव के युवाओं ने बुझाया। हालांकि इस आग से वन संपदा को अधिक नुकसान नहीं पहुंचा।