देहरादून- एनआईटी श्रीनगर के छात्रों का आंदोलन अब देश की राजधानी दिल्ली पहुंच गया है। श्रीनगर एनआईटी की छात्र-छात्राएं जो अपनी मांगों को लेकर महीने भर से अधिक समय तक श्रीनगर में धरना प्रदर्शन करते रहे वह अब अपनी उन्ही मांगों को लेकर जन्तर-मन्तर पर धरना प्रदर्शन कर रहे है। जन्तर-मन्तर पर धरना कर रहे इन छात्रों का यह धरना प्रदर्शन एमएचआरडी और राज्य सरकार के खिलाफ है। छात्रों का आरोप है कि एनआईटी श्रीनगर में प्रवेश लेने से उनका पूरा कैरियर दांव पर लग गया है। उनका कहना है कि एनआईटी श्रीनगर सिर्फ नाम का एनआईटी है यहाँ न तो शिक्षा की उचित व्यवस्था है और न मानकों के अनुरूप सुविधाएं। उनका कहना है कि साढ़े तीन एकड़ में अस्थायी तौर पर चल रहे श्रीनगर एनआईटी में स्थायी कैम्पस, छात्रावास और मेडिकल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है जिसके कारण छात्रों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन छात्रों की माँग है कि या तो श्रीनगर एनआईटी में स्थायी कैम्पस का निर्माण और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जाये अन्यथा संस्थान को किसी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाये। उनका कहना है कि प्लैसमेंट के लिए कोई भी कम्पनी यहाँ आने को तैयार नहीं होती।
बता दे कि आंदोलित छात्र किसी भी सूरत में एनआईटी श्रीनगर लौटने को तैयार नहीं है। इससे पूर्व वह एक महीने से भी अधिक समय तक संस्थान के कैम्पस में दिन रात धरने पर बैठे रहे। दीपावली से पूर्व इन सभी छात्रों ने कैम्पस छोड़ दिया था और वह अपने अपने घरों को चले गये थे जिसके बाद यह छात्र बुलाये जाने पर भी वापस नहीं लौटे। हालांकि एनआईटी प्रशासन और सरकार द्वारा उनकी मांगों को मानने का आश्वासन भी दिया गया लेकिन इन छात्रों का कहना है कि यह सब एक छलावा है। उधर सरकार ने यह साफ कर दिया है कि एनआईटी श्रीनगर को कहीं दूसरे स्थान पर शिफ्ट नहीं किया जायेगा। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत कह चुके है कि जो एनआईटी को शिफ्ट कराने का सपना देख रहे है उनकी मंशा कभी पूरी नहीं होगी। लेकिन इन छात्रों के भविष्य का क्या होगा जो कैम्पस लौटने को तैयार नहीं है इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। 9 साल में भी एनआईटी का स्थायी कैम्पस न बन पाना सरकार की भी एक बड़ी नाकामी माना जा रहा है।