Saturday, February 28, 2026
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इन्वेस्टर्स समिट- देवभूमि का होगा कायाकल्प, उत्तराखंड में निवेश को तैयार हैं कई बड़े उद्योगपति……

देहरादून- उत्तराखंड राज्य में निवेश करने के लिए इन्वेस्टर्स समिट में पहले दिन निवेशकों में काफी उत्साह दिखाई दिया। उत्तराखंड में निवेश की संभावनाओं को तलाशने के लिए कई बड़े औद्योगिक घराने इन्वेस्टर्स समिट में देहरादून पहुंचे। अडानी, अंबानी, आईटीसी, पतंजलि, महेंद्रा एंड महेंद्रा जैसे समूहों ने निवेश योजनाओं को लेकर हाथ बढाया है। इसके अलावा जापान और चेक गणराज्य के राजदूत भी निवेश की संभावनाएं तलाशते दिखे। सिंगापुर ने तीन बड़े सेक्टरों स्मार्ट सिटी, पर्यटन और एयर कनेक्टिविटी में उत्तराखंड के साथ समझौते करने की बात कही है। बता दें कि उत्तराखंड सरकार पिछले 3 महीने से इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों में जुटी हुई थी। 7 और 8 अक्टूबर को चलने वाले इस इन्वेस्टर्स समिट में देश विदेश की कंपनियां हिस्सा लिया। इन्वेस्टर्स समिट में अब तक 75 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश किये जाने की बात सामने आई है। इससे प्रदेश में करीब डेढ़ लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

मुकेश अंबानी

देश के सबसे बड़े अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी जियो के माध्यम से उत्तराखंड को डिजिटल देवभूमि बनाएंगे। इसके साथ ही राज्य में जियो पर्यावरण संरक्षण के लिए ईको फ्रैंडली बिजनेस को बढ़ावा देगा। अगले दो सालों के भीतर प्रदेश के 2185 स्कूलों व 200 कॉलेजों को हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्यए शिक्षा के क्षेत्र में भी रिलायंस निवेश का प्लान तैयार कर रहा है। इससे बड़े स्तर पर प्रदेश में रोजगार के अवसर मिलेंगे।

प्रणव अडानी

उत्तराखंड में निवेश के लिए अडानी ग्रुप के निदेशक प्रणव अडानी ने कहा कि वेलनेस सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश की विकास दर 11 प्रतिशत है, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने प्रदेश की उद्योग नीति की भी सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड में आधारभूत ढांचा निर्माण ग्रुप साढ़े छह हजार करोड़ रुपये निवेश करेगा। विद्युत ट्रांसमिशन में एक हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। मेट्रो में पांच हजार करोड़ का निवेश करेंगे। इसके अलावा जैविक खेती, पर्यटन और तीर्थाटन में भी निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

संजय पुरी

आईटीसी ग्रुप के सीईओ संजय पुरी ने उत्तराखंड को कई सेक्टर में निवेश के लिए उपयुक्त माना। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में कंपनी दो सौ करोड़ का निवेश करेगी। कंपनी का हरिद्वार में बड़ा मैन्युफैक्चरिंग कॉम्पलेक्स है, जहां कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। प्रदेश में कुशल कामगार और अच्छी विद्युत सप्लाई से निवेश का अच्छा माहौल है। उत्पादन और सर्विस सेक्टर में खासी संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि हरिद्वार में कंपनी ने 14 सौ करोड़ का कुल निवेश किया है, जिसे अब विस्तार दिया जाएगा। होटल सेक्टर में कंपनी अपने प्रदेश आठ वेलकम होटलों और रिसार्ट की संख्या को बढ़ाएगा। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग में भी किसानों से सब्जी और फल खरीद की जा रही है।

सिंगापुर के मंत्री एस ईश्वरन

समिट में पहुंचे सिंगापुर के सूचना प्रसारण मंत्री एस ईश्वरन ने कहा कि एशियान देशों में भारत सिंगापुर का दूसरा बड़ा सहयोगी है। दोनों देशों में बढ़ते आर्थिक रिश्तों का असर उत्तराखंड में भी दिखेगा। डिजिटल आर्थिकी की दशा में परस्पर सहयोग किया जा सकता है। उत्तराखंड में तीन बड़े सेक्टरों में सिंगापुर मदद दे सकता है। हमारे फोकस एरिया में स्मार्ट सिटी है, जिसमें देहरादून को विकसित करने में सहयोग दिया जाएगा। पर्यटन के क्षेत्र में केदारनाथ, गंगोत्री, बदरीनाथ जाने के बाद अहसास हुआ कि यहां व्यापक काम हो सकता है। इंटरनेशनल टूरिज्म में हम उत्तराखंड को सहयोग करेंगे। इसके अलावा हवाई सेवाओं को सुधारने में भी सिंगापुर सहयोग दे सकता है। सिंगापुर से देहरादून के लिए सीधी उड़ान भी शुरू की जा सकती है।

चेक गणराज्य के राजदूत मिलन होवोरका

चेक गणराज्य के राजदूत मिलन होवोरका ने कहा कि विश्व की योग राजधानी ऋषिकेश के पास पहुंच कर उन्हें बेहद अच्छा लग रहा है। उत्तराखंड तेजी से विकास करता राज्य है। उत्पादन क्षेत्र में चेक उत्तराखंड को सहयोग करने को तैयार है। उत्तराखंड के 12 मुख्य सेक्टरों में से कई पर निवेश की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। आटोमोबाइल, ऊर्जा, जल विद्युत ऊर्जा, आईटी, फूड प्रोसेसिंग और होटल सेक्टर में समझौते किये जा सकते हैं।

जापान के राजदूत केंजी हिरमात्सु

जापान के राजदूत केंजी हिरमात्सु ने कहा कि उत्तराखंड में रिसोर्स मैनेजमेंट का प्रोजेक्ट जापान के सहयोग से चल रहा है। उन्होंने कहा कि कई जापानी कंपनियां पहले से उत्तराखंड में काम कर रही हैं। इन कंपनियों ने प्रदेश में निवेश के माहौल को बेहद सकारात्मक बताया है। जापान टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बड़ा सहयोग दे सकता है। उत्तराखंड में लघु स्तर पर बुनकर कपड़ा बनाते हैं, इसके लिए ट्रेनिंग से लेकर तकनीक तक पर दोनों पक्ष काम कर सकते हैं।

 

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