देहरादून। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डाॅ. हरक सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वीरचंद सिंह गढ़वाली के परिजनों का प्रकरण उठाया है। आज सोमवार को भेजे गए योगी को एक पत्र में श्री रावत ने लिखा है कि जिस पेशावर विद्रोह के महानायक वीरचंद्र सिंह गढ़वाली को जिन्होंने 23 अप्रैल 1930 में अमानवीय अत्याचार के विरूद्ध कर वीरता का महान परिचय दिया था, जिन्हें महात्मा गांधी ने वीरचंद्र सिंह गढ़वाली की उपाधि प्रदान की थी और कहा था कि मेरे पास गढ़वाली जैसे चार व्यक्ति होते तो देश कब का आजाद हो गया होता। आज उन्हीं वीरचंद्र सिंह गढ़वाली के परिवार ने दो विधवा बहुओं और बच्चों पर बेघर होने का संकट हो गया है।
अपने पत्र में डाॅ. हरक सिंह ने लिखा है कि इस वीरता के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 21 जनवरी 1975 को शासनादेश संख्या 8829/14-2-674/73 के अनुसार बिजनौर जनपद के साहनपुर रेंज की हल्दूखाता वन क्षेत्र में कम्पार्ट संख्या 7 में वन रक्षक चैकी के समीप 10 एकड़ वन भूमि सशूल्क 90 वर्ष की लीज पर प्रदान की गई थी। किन्तु आज परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है तथा वह लीज शुल्क वहन करने में अक्षम है। उनका शुल्क माफ कर दिया जाए। विडंबना यह है कि 30 अगस्त 2018 को प्रभागीय वनाधिकारी बिजनौर द्वारा उक्त परिवार को अतिक्रमणकारी घोषित कर तत्काल जमीन खाली करने के निर्देश दिए है। संभव है यह प्रकरण आपकी जानकारी में न हो। इस पत्र के माध्यम से उत्तराखंड की जनता आपसे आग्रह करती है कि उनके संकट का समाधान किया जाए तथा संवेदनहीन अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाए। संख्या 753 वीआईपी/मंत्री वन/2018, 24/9/2018 को यह पत्र उत्तराखंड के वन मत्री डाॅ. हरक सिंह की ओर से भेजा गया है।



