
देहरादून । देहरादून से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष लगाव था। उनका यहां के लोगों से व्यक्तिगत परिचय तथा निरंतर आनाजाना इस बात का संकेत था कि वह देहरादून के लोगों से अच्छी तरह परिचित थे। हिन्दू साहित्य समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे विजय स्नेही ने एक संस्मरण सुनाया। श्री स्नेही ने बताया कि तरुण विजय की पुस्तक ‘शिव से साक्षात्कार’ का अटल जी को लोकार्पण करना था। उस समय देहरादून से कई प्रमुख कार्यकर्ता दिल्ली गए थे जिनमें श्री स्नेही के साथ नरेश बंसल, प्रभाकर उनियाल तथा अन्य लोग शामिल थे। पुस्तक लोकार्पण के बाद जलपान का कार्यक्रम था। उस समय श्री स्नेही ने अटल जी को एक पुराना संस्मरण सुनाया जिस पर अटल जी लोटपोट हो गए और कहा कि अच्छा वह तुम्हीं थे।
बात 1991 की है। 25 मार्च 1991 को नगर निगम प्रांगण में एक जनसभा थी जिसमें अटल जी को सवा लाख रुपये की थैली भेंट की जानी थी। कार्यक्रमों के आयोजकों में से एक प्रकाश सुमन ध्यानी अटल जी को सीधे मंच पर ले आए, उन्हें फ्रेश भी नहीं होने दिया। उस समय कमलेश कुमार संगठन मंत्री हुआ करते थे। कार्यक्रम काफी छोटा चला। इसका कारण अटल जी को फ्रेश होने जाना था लेकिन अटल जी ने यह बात नहीं कही और कहा कि भेंट में राशि कम है, इसलिए उनका भाषण भी कम होगा और यह कहकर मंच से उतर गए। कार में बैठे और कहा जल्दी ले चलो। चालक के रूप में विजय स्नेही कार में बैठे हुए थे। उन्होंने ईसी रोड, राजपुर रोड होते हुए अटल जी को सर्किट हाउस पहुंचाया। सर्किट हाउस में कार से उतरते ही अटल जी तीर की तरह निकले और जब तक विजय स्नेही जी कार पार्क अंदर पहुंचते तक तब वह आकर सोफे पर निढाल होकर बैठे थे।
दिल्ली में जब स्नेही जी ने जब अटल जी को यह संस्मरण सुनाया तो वह ठहाके मारकर हंस पड़े और बोले अच्छा वह तुम्ही थे। लगभग एक दर्जन कार्यक्रमों में अटल जी से निरंतर भेंट होती रही। विजय स्नेही का कहना है कि अटल जी जैसा विलक्षण व्यक्तित्व न हुआ है और न होगा जो बड़ी से बड़ी बात को भी बड़ी आसानी से हंसकर कह देते थे।