Monday, February 23, 2026
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किस घर में केतु शुभ होता है, किस घर में अशुभ…! जानने के लिए पढ़ें और शेयर कीजिए

  • नौ ग्रहों में राहू-केतु भी शामिल है, जिन्हें छाया ग्रह माना जाता है। हमारी कुंडली में इनका कोई निश्चित स्थान नहीं होता लेकिन वह किसी भी भाव जिसमें बैठे हों तथा जहां इनकी दृष्टि पड़ रही हों, उन स्थानों इनका अच्छा-खास प्रभाव पड़ता है। यह केवल कू्रर ग्रह ही नहीं वरन् इनकी अच्छी दृष्टि हो तो अच्छी-खासी उन्नति होती है, इसलिए केतु पर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। जहां बैठा हो वहां सन्तुष्टि नहीं हो पाती केतु मोक्ष का कारक है केतु का पेट पर प्रभाव व अधिकार है| कुत्ते को केतु का रुप माना गया है।
    यदि केतु सप्तम घर में शुभ है, तो जातक श्रमसाध्य, अमीर और खुशहाल होगा। लेकिन अपनी संतान की वजह से हमेशा चिंतित और परेशान होगा। वह लगातार स्थानान्तरण या यात्रा डरा रहेगा लेकिन अंत में यह हमेशा ये स्थगित हो जाया करेंगे।
  • जब वर्ष कुंडली में केतु पहले घर में आता है तो जातक के घर पुत्र या भतीजे का जन्म हो सकता है।
  • लम्बी यात्रा भी हो सकती है।
  • सूर्य की उच्चता के कारण ऐसा जातक हमेशा अपने माता पिता और गुरुजनों के लिए फायदेमंद होगा।
    यदि पहले घर में केतु अशुभ हो तो जातक सिर दर्द से पीड़ित होगा। उसकी पत्नी स्वास्थ्य समस्याओं और बच्चों से संबंधित चिंताओं से ग्रस्त होगी।
  • यदि दूसरा और सातवां घर खाली हो तो बुध और शुक्र भी बुरे परिणाम देते है।
    बिना फायदे के स्थानांतरण और यात्राएं होंगी।
  • यदि शनि नीच का हो तो यह पिता और गुरु को नष्ट करेगा।
  • यदि सूर्य सातवें या आठवें स्थान में हो तो पोते के जन्म के बाद स्वास्थ्य खराब रहेगा।

उपाय:

(1) बंदरों को गुड़ खिलायें।
(2)केसर का तिलक लगाएं।
(3)यदि संतान से परेशान है तो मंदिर में काले और सफेद रंग वाला कंबल दान करें।
(4) सुबह और शाम के समय भीख नहीं देनी चाहिए।

 

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