पूर्व सीएम की आम पार्टी का श्रेय वर्तमान सीएम ने बटोरा, कांग्रेस में खलबली!


देहरादून। भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों में इन दिनों घमासान मचा हुआ है। इसका कारण 2019 के चुनाव है। हर दल जिताऊ उम्मीदवार पर दाव लगाना चाहता है। यही कारण है कि हल्के-पुल्के उम्मीदवार या जिन्हें टिकट न मिलने की उम्मीद है वह दूसरे दलों की ओर रूख कर रहे हैं। अभी पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आम और फलों की दावत दी। इसे संयोग ही कहेंगे कि इस दावत में वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पहुंचे। भले ही इस प्रकरण में सौजन्यता की बैठक कहा जाए पर निश्चित रूप से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस ढंग से विपक्ष को पूरी तरह पानी कर दिया है और उनकी सारी तेवरी और हेकड़ी निकाल दी है, यह इस बात का संकेत है कि उनके लिए सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के लोग भी अपने हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता पंडित नारायण दत्त तिवारी को छोड़ दिया जाए तो यह उदारता कम लोगों में मिलती है जो त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आम पार्टी में पहुंच कर दिखाई। दोनों के एक साथ खिंचे चित्र ने भले ही दोनों दलों यानि भाजपा और कांग्रेस दोनों को असहज कर दिया हो पर यह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह के खाते में जाएगा कि उन्होंने विपक्ष के खेमे में भी खलबली मचा दी है।


कांग्रेस में इस मुलाकात के अलग-अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। पीसीसी प्रमुख प्रीतम सिंह का कहना है कि कम से कम मैं अगर विपक्ष में होता तो ऐसी दावत में न जाता। लेकिन यह बयान खीझ में दिया हुआ बयान माना जा सकता है। इस आम पार्टी में जाकर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक तीर से कई निशाने साधे है। जहां उन्होंने विपक्ष के नेताओं को असहज कर दिया है, वहीं अपने विरोधियों को भी यह जता दिया है कि उनके लिए कोई अपना और पराया नहीं। एक सफल मुख्यमंत्री का यही उद्देश्य होना चाहिए। यह चर्चा अब राजनीतिक जानकार लोग करने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि उत्तराखंड के प्रथम चयनित मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता पंडित नारायण दत्त तिवारी ही एक ऐसे नेता था जो सत्ता पक्ष और विपक्ष में भेद नहीं चाहते थे, उनके लिए सत्ता पक्ष का भी उतना ही महत्व था जितना विपक्ष का। संभवत: प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी ऐसी ही पारी खेलना चाहते है जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए समान आदर हो। वैसे भी मुख्यमंत्री और मंत्री चुने जाने के बाद एक शपथ लेनी होती है जिसमें सबको समान रूप से देखने और बिना राग द्वेश के कार्य करने की शपथ ली जाती है। संभवत: यह शपथ पूरी तरह चरितार्थ करने का काम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कर रहे हैं। जिसके लिए भाजपा के कुछ नेताओं की भी तेवरी चढ़ गई थी।
इसे संयोग कहेंगे कि उसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री राजनीति सिंह का जन्मदिन था को बधाई देने के लिए मुख्यमंत्री को दिल्ली जाना पड़ा। ऐसे में मुख्यमंत्री विरोधी सोशल मीडिया के वीर पत्रकारों ने चंडुखाने की खबर उड़ा दी कि आम पार्टी में भाग लेने के कारण आलाकमान ने मुख्यमंत्री को दिल्ली तलब किया गया है। लेकिन ऐसे ही सोशल मीडिया के बहादुर पत्रकारों ने अगले दिन कुछ और ही छापा, जो इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं पुराने मुख्यमंत्रियों की तर्ज पर नये मुख्यमंत्री को भी अस्थिर करने की कोशिशें हो रही है जिसमें सोशल मीडिया के कुछ प्रमुख लोग भागीदार हैं, जो चाहे-अनचाहे बे-सिर पैर की खबरों को हवा दे रहे हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में टिहरी राजघराना पहले कांग्रेस का घनघोर पक्षधर रहा है और टिहरी के राज परिवार के लोग कई बार कांग्रेस से सांसद रहे हैं। समय बदलने के साथ इस परिवार ने राष्ट्रवादी भाजपा के साथ तालमेल किया और अब पिछले कई वर्षों से टिहरी राज परिवार की सदस्य भाजपा के सांसद हैं। वर्तमान में टिहरी गढ़वाल से श्रीमती मालाराज लक्ष्मी शाह भाजपा की सांसद हैं। भाजपा अपने प्रत्याशियों की एक उम्र तय कर चुकी है। इस उम्र से अधिक के प्रत्याशी और सांसद शायद ही टिकट प्राप्त कर सकें, जिसके कारण चर्चा यह है कि माला राजलक्ष्मी शाह एक बार फिर कांग्रेस की ओर रूख कर सकती है लेकिन इस चर्चा की किसी ओर से पुष्टि नहीं हो रही है।
यह बात जरूर है कि पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं से भेंट की जिसे सामान्य और औपचारिक भेंट बताया जा रहा है। ठीक यही स्थिति नैनीताल के पूर्व सांसद रहे केसी सिंह बाबा की है, जो काशीपुर में भाजपा कार्य समिति में देखे गए। इनका कार्य समिति में आना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं भाजपा से बाबा की नजदीकियां बढ़ रही है, हालांकि यह महज संयोग भी हो सकता है, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा के वर्तमान सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने आगामी चुनाव न लड़ने की घोषणा की है, ऐसे में यदि केसी सिंह बाबा भाजपा की ओर रुख करते हैं तो उनके लिए खुला मैदान मिल सकता है।
यह चर्चा कितनी दमदार है यह तो समय बताया लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह का कांग्रेस की फल पार्टी में जाना और कांग्रेस में खलबली मचना तथा कांग्रेस के दिग्गज नेता केसी सिंह बाबा का भाजपा की कार्य समिति में दिखाई देना कहीं न कहीं इस बात की चुगली करता है। भाजपा नेताओं ने जनता में ही नहीं राजनीतिक दलों के नेताओं में भी अच्छी खासी पैठ बनाई है जिसका लाभ उन्हें आने वाले चुनाव में मिल सकता है। ठीक यही स्थिति टिहरी की सांसद श्रीमती माला राजलक्ष्मी शाह के बारे में भी कही जा सकती है कि यदि उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वह कांग्रेस से भी दावेदार हो सकती है। इन चर्चाओं में कितना दम है यह समय बताएगा पर इन चर्चाओं के कारण वर्षों तक सत्तासुख भोग चुकी कांग्रेस में काफी हलचल है और इन चर्चाओं से पीसीसी प्रमुख प्रीतम सिंह समेत तमाम लोग पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके सहयोगियों से काफी नाराज लगते हैं, जिसका प्रमाण तरह-तरह के बयान तथा नेताओं की जितनी मुंह उतनी बातें हैं।