
देहरादून। वृहस्पतिवर को एक बार फिर ध्वस्तिकरण अभियान प्रारंभ हो गया है। उच्च न्यायालय नैनीताल के निर्देश पर जारी अभियान के तहत 123 अवैध कालोनियों के चिह्निकरण के साथ लगभग 2000 से अधिक छोटे-बड़े अतिक्रमण हटाए जा चुके है और 3400 के लगभग अतिक्रमण चिह्नित किए जा चुके है। एमडीडीए, नगर निगम, तहसील तथा प्रशासन के सहयोग से जारी इस अभिया में आठ टीमें का कर रही है। भारी वर्षा के कारण बुधवार को काम बंद था लेकिन आज पुन: प्रारंभ हो गया है। भारी विरोध के कारण पल्टन बाजार में चिह्निकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। रिस्पना और बिंदाल की अवैध बस्तियों को नोटिस देकर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है। सहस्रधारा रोड़, चकराता रोड, रिंग रोड पर अवैध अतिक्रमण हटाए गए हैं, जिनमें सहस्रधारा रोड का ब्रह्मावाला खाला एक बार फिर सुर्खियों में रहा है।
उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा प्रशासन को दिए गए निर्णय के अनुसार अवैध अतिक्रमण ध्वस्त किया जा रहा है लेकिन जिन अधिकारियों के कार्यकाल में अवैध अतिक्रमण हुआ, उन पर कार्यवाही न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
हाईकोर्ट द्वारा 18 जून को जो दिशा निर्देश शासन को दिये गये हैं। उसके पैरा नं- 2 में मुख्य सचिव को साफतौर पर उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है जिनके कार्यकाल में निगम या सरकारी अथवा वन भूमि पर कब्जे हुए हैं। या प्रकाश में आये हैं। हाईकोर्ट ने मुख्यसचिव को कहा कि वह नोडल एजेंसी के माधयम से ऐसे सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करें भले ही वह वर्तमान में पद हों या सेवानिवृत्त हो चुके हों।
उधर विधायक गणेश जोशी का कहना है कि यह अतिक्रमण जिनकी शह पर हुआ था। जिन्होंने अतिक्रमण कराने में सहयोग किया उन पर अदालत की कार्यवाही करना चाहिए। उनका इशारा भी सत्ता में रहते हुए अतिक्रमण कराने वाले नेताओं और अधिकारियों की ओर ही था जिनके कारण दून में इतने व्यापक स्तर पर अतिक्रमण हुआ है उनकी मांग पर मुख्य सचिव को गौर करने की जरूरत है।



