
देहरादून। आगामी सितंबर माह में ही होंगे स्थानीय निकाय चुनाव। इसका कारण उस समय प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होना है। प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रही न्यायालयी प्रक्रिया के कारण लगातार चुनाव टलते आ रहे हैं। विपक्ष इसे सरकार की हताशा-निराशा बता रहा है। विपक्ष मानता है कि सरकार के विरुद्ध जनता में रूझान है, जिसके कारण सरकार चुनाव नहीं कराना चाहती। दूसरी ओर सत्ता पक्ष का मानना है कि थराली उप चुनाव में जनता ने अपना मंतव्य पार्टी के पक्ष मे प्रकट किया है, ऐसे में विपक्ष हताश और निराश है। दूसरी ओर अब बरसात आ गई है, बरसात में पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने जैसी तमाम घटनाएं होती रहती है, ऐसे में शायद ही चुनाव हो। वर्षा ऋतु में चुनाव में जाना शायद ही किसी दल के लिए उचित है। हालांकि सरकार और विपक्ष दोनों यह दावा कर रहे हैं कि वह चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन सरकार ने लगभग 84 नगर निकायों में चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। प्रदेश में कुल 92 नगर निकाय है जिनमें कुछ में स्थगनादेश लागू है।
यह वहीं 84 स्थानीय निकाय चुनाव है जिनमें राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच चुनाव की सहमति बन गई थी लेकिन रुड़की की आरक्षण प्रक्रिया के कारण मामले पर धूल बैठ गई और उच्च न्याालय ने नगर पालिका परिषदों से संबंधित अधिसूचना निरस्त कर दी थी। सरकार को न्यायालय की ओर से कोई आस दिखी और लगातार झटके पर झटके लगते रहे।
सरकार ने उच्च न्यायालय नैनीताल के सिंगल बैंच के फैसले को डबल बैंच में ले जाने को कहा था लेकिन जब तक इस संदर्भ में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है। निकायों के कार्यकाल 3 मार्च को समाप्त हो गए थे, जिनमें छह माह के लिए प्रशासकों की नियुक्ति कर दी गई थी। जिनका कार्यकाल सितंबर में ही समाप्त होना है, ऐसे में लगता है कि सरकार सितंबर में ही स्थानीय निकाय चुनाव कराएगी।




