
देहरादून। उत्तराखंड के सूचना अधिकार के कार्यकर्ताओं को अब निराशा ही हाथ लगेगी। इसका कारण सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की कमी के कारण सुनवाई न होना है। उत्तराखंड में एक बार सभी सूचना आयुक्त अपने पदों पर थे और हजारों की संख्या में सूचनाओं का निपटारा हुआ लेकिन एक-एक कर रिटायर होते इन सूचना आयुक्तों की कड़ी में सुरेंद्र सिंह रावत का भी कार्यकाल पूरा हो गया है। अब मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह ही सूचना आयुक्त के रूप में बचे हैं। उच्च न्यायालय मानता है कि सूचना आयुक्त के अकेले होने के कारण कॉलम पूरा नहीं माना जा सकता, जिसके कारण सुनवाई नहीं हो सकती, इसके लिए कम से कम दो सूचना आयुक्तों का होना जरूरी है। 2009 में एक अपील पर हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया था। एक बार फिर वही स्थिति आ गई है जिसके कारण मुख्य सूचना आयुक्त ने शासन को कम से कम एक सूचना आयुक्त नियुक्त करने का पत्र लिखा है ताकि अपीलार्थियों को न्याय मिल पाए। सूचना आयुक्त के चयन में नेता प्रतिपक्ष का विशेष महत्व होता है। 28 मई को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित चयन समिति की बैठक को नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदेयश ने स्थगित करा दिया था। जहां पांच सूचना आयुक्त कर रहे हों और चार सूचना आयुक्तों का कार्यकाल समाप्त हो गया हो ऐसे में एक सूचना आयुक्त क्या सुनवाई करेगा। लेकिन नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश अपनी हठधर्मी छोड़कर कब चयन समिति को चयन की मंजूरी देगी, यह समय बताएगा। केवल एक सदस्य की मनमानी के कारण पूरा सूचना आयोग समाप्त जैसा है।




