
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को हिन्दू-मुस्लिम में बांटने का प्रयास प्रारंभ हो गया है। मलिन बस्ती क्षेत्रों में बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों के बसने के कारण समस्या गंभीर होती जा रही है। प्रयास तो रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के भी हो रहे हैं लेकिन गुप्तचर इकाइयों की ढिलाई के कारण स्थिति गंभीर हो रही है। इसका प्रमाण उप जिलाधिकारी देहरादून प्रत्यूश सिंह द्वारा एमडीडीए कालोनी की तथाकथित मस्जिद पर दिया गया आदेश है जिसको मुस्लिम समाज नकारने का प्रयास कर रहा है। बस्ती के बीच में बनी यह तथाकथित मस्जिद मूलत: दो मकानों को तोड़कर बनाई गई है और इसे धार्मिक स्थल का स्वरूप देकर साम्प्रदायिकता भड़काने का प्रयास किया जा रहा है, जिस पर उप जिलाधिकारी ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इस तथाकथित मस्जिद में कथित भवन स्वामी और इमाम ही नमाज पढ़ सकते हैं। यह सार्वजनिक मस्जिद की श्रेणी में नहीं है। लेकिन अब मुस्लिम समाज के लोग उप जिलाधिकारी के फैसले पर ही उंगली उठा रहा है तथा उसे बेतुका बता रहा है। मस्जिद के पैरोकारों का मानना है कि देहरादून पुलिस द्वारा विधिवत रुप से संचालित हो रही मस्जिदों की परमिशन दिखाने को लेकर व मस्जिदों में कौन-कौन नमाज पढ़ता है पर भी बहस शुरू हो गई है। मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि इस तरह के सवालों से उन पर बेबुनियादी तरीके से परेशान व दबाव बनाया जा रहा है। यह लोग कानून व्यवस्था में भी राजनीतिक दबाव देख रहे हैं जो इस बात का संकेत है कि इन्हें न तो अधिकारियों पर भरोसा है और न ही कानून पर। इसी संदर्भ में कुछ लोग जिलाधिकारी एस मुर्गेशन से मिले। मिलने वालों में कई कांग्रेस नेता भी शामिल थे जो इस बात का संकेत है कि कांग्रेस इस तथाकथित मस्जिद के बारे में राजनीति कर रही है।
इस संदर्भ में क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मस्जिद पूरी तरह अवैध है तथा इससे बहुसंख्यक समाज के धार्मिक भावनाओं का हनन किया जा रहा है। कालोनी के बीच में इस तरह की गतिविधियां बंद होनी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने इस संदर्भ में स्थानीय थाना तथा जिलाधिकारी को पत्र देकर उचित कार्यवाही की मांग है। उनका कहना है कि यह पूरी तरह धर्म स्थल है। प्रशासन को इस संदर्भ में कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। इस पत्र पर सैकड़ों बहुसंख्यक समाज के लोगों के हस्ताक्षर है। जिनमें प्रमुख रूप से प्रवीन त्यागी (टीटू), कांग्रेस पार्षद आनंद त्यागी, एडवोकेट रोबिन सिंह, भगवान सिंह बिष्ट, मूर्ति देवी, सरोजबाला, मधुबाला, गुलाब सिंह बिष्ट, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार नरेंद्र रस्तोगी, वीर सावरकर युवा मंच के कार्यकर्ता के कार्यकर्ता तथा सैकड़ों लोग ऐसे है जिनका मानना है कि हर हालत में यह धार्मिक स्थल हटना चाहिए अन्यथा इससे अव्यवस्था पैदा होगी और कभी भी धार्मिक भावनाएं भड़क सकती है जिसका दुष्परिणाम सबको झेलना पड़ेगा।
दूसरी ओर जिलाधिकारी से मिलने वालों में शहर काजी मो0 अहमद काजमी,व शहर मुफ्ती सलीम अहमद व मुफ्ती रहीष अहमद व कांग्रेस नेता आजाद अली व वसीम अहमद,इल्यास अंसारी, शाहनवाज, शहर के मस्जिदों के कुछ प्रमुख लोग शामिल थे।इन लोगों ने सुरक्षा इकाइयों पर भी सवाल उठाए हैं।



