
देहरादून। शहर से लगभग 15 किलोमीटर स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज एक बार फिर अपने छात्रा-छात्राओं के लिए बबालेजान बन रहा है। इसका कारण एमसीआई की सख्ती है, जिसने मेडिकल कॉलेजों पर लगाम कसनी शुरू कर दी है। इसका प्रमाण सुभारती मेडिकल कॉलेज है। अमर श्री देव सुमन के नाम पर सुभारती मेडिकल कॉलेज संचालित करने वाले संचालकों द्वारा फर्जी विश्वविद्यालय से परीक्षा कराने पर एमसीआई ने 12 अप्रैल 2018 को कड़ी टिप्पणी की थी, जहां छात्र और अभिभावक पशोपेश में है, वहीं दूसरी ओर सिर्फ कोर्ट की सहमति से चल रहे इस कॉलेज को एमसीआई द्वारा अनुमति नहीं दी गई है, जिसके कारण इस मेडिकल कॉलेज के छात्रों को अन्यत्र स्थापित करना होगा। इसका कारण मेडिकल कॉलेज प्रशासन की गलतियां है। एमसीआई के नियम सेक्शन 10 के अनुसार प्रत्येक मेडिकल व डेंटल कॉलेज को 5 वर्ष तक प्रत्येक वर्ष एमसीआई एवं डीसीआई से हर वर्ष निरीक्षण करवाना आवश्यक होता है, इसके लिए मानकों पूरा होना भी जरूरी है। उसी आधार पर एमसीआई अनुमति देता है। मेडिकल में 18 -20 विषय होते हैं इसक लिए तीसरे से पांचवें वर्ष की पढ़ाई के लिए लगभग 200 से 300 प्राध्यापकों तथा अन्य स्टाफ की जरूरत होती है। यदि कोई कॉलेज तीसरे वर्ष की अनुमति न मिले तो वे सभी अर्हताएं पूरी नहीं कर पाते, जिसका परिणाम छात्रों को भुगतना पड़ता है। पहले भी यह कॉलेज इस तरह की समस्याओं का शिकार हो चुका है, उसके बाद भी व्यवस्था सुधर न होना इस बात का संकेत है कि प्रबंध तंत्र अब भी नहीं सुधर रहा है। स्वामी नारायणमुनि के नाम से वर्मा परिवार द्वारा संचालित यह कॉलेज पहले भी बदनामशुदा था, एक बार पिफर वही स्थिति बन नहीं है। पहले भी इस कॉलेज में बी डी एस में तीसरे वर्ष 2009-10 अनुमति न मिलने पर छात्रों को राज्य सरकार ने अन्य कॉलेजो में शिफ्ट कर दिया था ।
वहीं सभी छात्र व अभिभावक ठगा जाने पर इस कॉलेज के संचालक डॉ अतुल कृष्ण भटनागर व तथाकथित यूनिवर्सिटी व कॉलेज के फर्जी चांसलर यशवंत रस्तोगी, मुक्ति भटनागर आदि के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाने की तैयारी कर रहे हैं। सुभारती कॉलेज देहरादून ने 2018-19 की अनुमति न मिलने पर फिर तीसरी बार कोर्ट की शरण ली थी। परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने सुभारती की याचिका निरस्त कर दी है।


