
देहरादून। आखिरकार लापरवाही का दंड ऊर्जा निगम को भुगतना ही पड़ा। यह बात अलग है कि विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन देने में देरी और लापरवाही करने वाले यूपीासीएल को लगाये गए 14 करोड़ 58 लाख रुपये का जुर्माने को छह किस्तों में देने की राहत दी है। जानकारी देते हुए विद्युत नियामक आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि विद्युत नियामक आयोग की धारा 43 (3) में प्रावधान है कि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किए जाने के बाद अगर यूपीसीएल निश्चित समय में कनेक्शन देने में असफल रहता है तो खुद ही जुर्माना लग जाता है।इसकी गणना धनराशि पर 10 से 1000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगाया जाता है. उक्त जुर्माना यूपीसीएल के विद्युत वितरण खंडों द्वारा मासिक रिपोर्ट के साथ आयोग में जमा कराए जाने का भी प्रावधान है।
आयोग ने 2009 से 2015 तक करीब 40 हजार से ज्यादा कनेक्शनों में देरी पर छह करोड़ 51 लाख, 89 हजार 545 रुपये का जुर्माना लगाया था. इस जुर्माने की रकम को लेकर यूपीसीएल के एमडी बीसीके मिश्रा ने आयोग से निवेदन किया कि पुराने प्रकरणों में सुधार लाया जाएगा।इसमें देरी के लिए खंड व उप खंडों में तैनात कार्मिकों की जिम्मेदारी तय करने का भरोसा देते हुए माफी का अनुरोध किया. मगर, आयोग के चेयरमैन सुभाष कुमार ने छह किश्तों में उक्त रकम जमा करने को कहा।इसी बीच आयोग ने पाया कि यूपीसीएल ने 2015 व 2016 में करीब 18 हजार 600 कनेक्शन देने में देरी की है।ऐसे में आयोग ने पुराने प्रकरण को भी माफ़ करने से इनकार करते हुए अब नए सिरे से 14 करोड़ 58 हजार का जुर्माना जल्द आयोग में जमा करने के आदेश दिए हैं।इस दौरान आयोग ने एमडी के अनुरोध पर कार्रवाई न होने पर नाराज़गी जाहिर कर सवाल खड़े किए. आयोग के सचिव नीरज सती ने बताया कि यदि अब उक्त जुर्माने की रकम जमा न हुई तो आयोग को कानूनी कार्रवाई करने को बाध्य होना पड़ेगा. इस संबंध में आयोग ने कड़े आदेश जारी कर दिए हैं।




