
देहरादून। अपराधिक न्याय प्रणाली के तीन अंग है न्यायपालिका पुलिस एवं कारागार विभाग किसी भी भौगोलिक जनवरी क्षेत्र में प्रशासन को सुचारु रुप से चलाने में जिला जज जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक एवं कारागार विभाग की स्थापना सुचारु प्रशासन के लिए आवश्यक होता है।
आपराधिक न्याय प्रणाली में तीनों अंगों न्यायपालिका पुलिस एवं कारागार में कारागार विभाग के दायित्व सर्वाधिक जटिल एवं अत्यंत उत्तरदायित्व भरा होता है क्योंकि उन्हें पुलिस के द्वारा पकड़े गए न्यायालय के द्वारा प्रेषित बंधुओं को ना केवल सुरक्षा प्रदान करना होता है अपितु उनकी दिनचर्या के समस्त उपादान उपलब्ध कराते हुए मानवीय विकास के प्रक्रम भी उपलब्ध कराने होते हैं।
उत्तराखंड राज्य में वर्तमान में कारागार विभाग के अधीन एक केंद्रीय कारागार सात जिला कारागार तथा दो उप कारागार एवं एक खुली जेल जोकि डॉक्टर संपूर्णानंद शिविर सितारगंज के नाम से जानी जाती है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तराखंड राज्य में कारागार विभाग में मुख्यालय संवर्ग एवं अधीनस्थ कार्यालय संवर्ग हेतु स्वीकृत कार्य पदों में वर्तमान स्थिति का जो आंकड़ा इस वर्ष प्रस्तुत किया गया है उसमें मुख्यालय संवर्ग में 37 में से 20 पद खाली हैं ।
यही नहीं अधीनस्थ कारागार संवर्ग हेतु स्वीकृत पदों की संख्या में 1030 में से 374 पद खाली पड़े हैं और हैरत की बात तो यह है कि चिकित्साधिकारी के 10 के 10 पद खाली पड़े हुए हैं यही नहीं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का एक पद प्रशासनिक अधिकारी के 2 पद प्रधान सहायक के तीन पद वरिष्ठ सहायक के चार पद आटा चक्की मिस्त्री के 5 में से 5 पद खाली पड़े हुए हैं।



