
एमबीबीएस की फीस वृद्धि को लेकर पिछले 4 दिनों से चल रहा आंदोलन के कारण आखिरकार राज्य सरकार को बैकफुट पर आकर फीस वृद्धि की घोषणा वापस करनी पड़ गई है गौरतलब है कि इस पूरे मामले में इतनी फलित करने के बाद आखिर सरकार के हाथ बदनामी के सिवा और कुछ भी ना लगा. सरकार ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के साथ मिलकर निजी स्वार्थों के कारण फीस वृद्धि को मेडिकल कॉलेजों के ही हवाले कर दिया था. इसको लेकर केंद्र सरकार ने भी आपत्ति जताई थी और तत्काल फीस मॉनिटरिंग कमेटी बनाकर फीस का निर्धारण करने के आदेश दिए थे. लेकिन सरकार ने फीस मॉनिटरिंग कमेटी बनाने के बजाय फीस वृद्धि का फैसला कैबिनेट में ले जाकर मेडिकल कॉलेजों को लूट की खुली छूट दे दी सरकार ने ना सिर्फ आने वाले वर्षों की फीस बढ़ा दी बल्कि 2016 17 और 17 18 की फीस बढ़ोतरी के लिए मेडिकल कॉलेजों को छूट दे दी थी लिहाजा मेडिकल कॉलेजों ने 4 गुना तक फीस बढ़ा दी थी. और छात्रों को नोटिस थमा दिए सरकार के इस तुगलकी फरमान को लेकर MBBS की पढ़ाई कर रहे छात्र अपने अभिभावकों के साथ आंदोलन पर उतर आए थे. 4 दिनों के आंदोलन में देशभर में सरकार की काफी किरकिरी हुई जो मुख्यमंत्री 1 दिन पहले निवेशकों के प्रवक्ता के रूप में बातें करते हुए दिखाई दे रहे थे, वह एक दिन में ही छात्रों के पक्ष में खड़े दिखे.




