
देहरादून . विज़न 2020, Exclusive: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस केवल जुमला नहीं वरन एक सतत प्रक्रिया है जो पिछली सरकार में नहीं दिखी लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पर जो महत्वपूर्ण कार्य किया है वह सही मायने में बेमिसाल है। अब भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नयी जांच एजेंसी गठित करने का निर्णय लिया गया है, जिसका शीघ्र ही खुलासा हो जाएगा। इतना ही नहीं सचिवालय का चौथा तल जो भ्रष्टाचार के लिए दलालों का अड्डा कहा जाता था, पूरी तरह माफिया मुक्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री स्वयं मानते हैं कि भाजपा सरकार आने से पहले आमजन भ्रष्टाचार से त्रस्त था। स्थानान्तरण और नियुक्तियों को कुछ लोगों ने व्यवसाय बना लिया था और अपने हिसाब ही सबकुछ कर रहे थे। जैसे ही भाजपा सरकार आयी उनका धंधा समाप्त हो गया। यह भ्रष्टाचार पर कड़ी चोट है। करीब आधा दर्जन लोगों ने यह आरोप लगाया था कि नियुक्ति के नाम पर उनसे सचिवालय के भीतर ही पैसे लिए गये थे, इसके लिये कुछ लोगों पर अंकुश भी लगा जो इस बात का संकेत है कि इस सरकार ने भ्रष्टाचार पर तगड़ी नकेल कसी है। मुख्यमुत्री त्रिवेद्र सिंह रावत ने एक वर्ष में जहां सैकड़ों ऐसे प्रभावकारी काम किए है जो औरों के लिए दुर्लभ थे।
सीएम टीएसआर के कायल हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के नेता हरीश रावत ने भी माना है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली अच्छी है। विपक्ष कुछ न कहे यही सत्ता के लिए प्रमाण होता है कि वह अपना काम अच्छी तरह चला रही है लेकिन विपक्ष द्वारा विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा यह प्रमाण दिया जाना कि सरकार के मुखिया की कार्यशैली अच्छी है, इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस केवल जुमला नहीं यथार्थ है।
सचिवालय में बायोमेट्रिक की हाजिरी सही मायने में नयी कार्य संस्कृति की शुरूआत है। इतना ही नहीं नौकरशाही पर जिस तरह नकेल कसी गई है तथा उस नौकरशाही को नियंत्रित किया गया है जो अपने कामों के लिए काफी चर्चित रहती थी। यह इस बात का संकेत है कि सरकार किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी।
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