
हनुमानजी का एक ऐसा मंदिर जहाँ मत्था टेकने पर हर मुराद होती है पूरी, जानकर अप भी दौड़े चले आएंगे. जानने के लिए पढ़ें. अगर आप भी हनुमानजी के भक्त हैं तो लाइक एंड शेयर करें.
श्री सिद्धबली धाम मंदिर तीर्थनगरी हरिद्वार से मात्र 76 किमी की दूरी पर कोटद्वार, ज़िला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड मे स्थित है । श्री सिद्धबली धाम कोटद्वार नगर से 2 किमी दूर पहाड़ो की सुरम्य वादियों में स्थापित है, जो कि रामभक्त, पवनपुत्र हनुमान को समर्पित है । ऐसा माना जाता है कि श्री सिद्धबली धाम कोटद्वार में बाबा की चौखट से आज तक कोई भी श्रद्धालु निराश नहीं लौटा । मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां जरुर पूरी होती है। श्रद्धालुओं पर बजरंग बली की नेमत इस कदर बरसती है कि यहां भंडारा आयोजन के लिए भक्तों को सालों साल इंतजार करना पड़ता है।
कहा जाता है कि शिव अवतार के रूप में माने जाने वाले नाथ संप्रदाय एवं तन्त्र मंत्रों के जनक गुरू गोरख नाथ जी द्वारा बजरंगबली हनुमान जी को यहां पर प्रहरी की तरह रहने हेतु वचन वृद्ध कर दिया था जिसकी कथा गोरखपुराण में उल्लेखित है। इसलिये मान्यता है कि इस स्थान में वचनबद्ध होने के कारण आज भी हनुमान जी यहां पर प्रहरी की तरह रहकर भक्तो का कल्याण करते है।इस स्थान को सिद्ध (गोरखनाथ) एवं बली (बजरंगबली जी) की एक साम्य होने के कारण इस दिव्य स्थान को सिद्धबली धाम कहा गया है।

रविवार को यहां भक्तों की बड़ी भीड़ लगती है ऐसी मान्यता है कि श्री सिद्धबाबा सप्ताह में छः दिन समाधिस्त रहते थे, एवं केवल रविवार को अपने भक्तों को दर्शन देते थे जिस कारण यह मान्यता है कि श्री सिद्धबाबा रविवार को किसी न किसी रूप में दर्शन देते हैं।
बता दें कि भंडारे के आयोजन के लिए मंदिर समिति की ओर से बुकिंग की जाती है तथा रविवार, मंगलवार और शनिवार को विशेष भंडारा होता है। श्री सिद्धबली धाम की ख्याति देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक है। हर साल लाखों भक्त देश एवं विदेश से धाम पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि आदिकाल में मंदिर स्थल पर सिद्ध पिंडियां थीं। 80 के दशक में मंदिर में बाबा की मूर्ति स्थापित हुई। इसके बाद ही मंदिर का सुंदरीकरण हुआ। कहा जाता है कि हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए इसी रास्ते गए थे।