कहते है न मज़बूरी में इंसान को क्या-क्या नही करना पड़ता है, ऐसे ही एक मामला सामने आया है जंहा पैसों के आभाव में एक मजदूर ने अपने 15 दिन के बेटे को बेच डाला। अब उसे अपने बेटे की जुदाई का दर्द सता रहा है। लेकिन उसके पास इतने रुपये नहीं हैं, जिन्हें चुका कर वह अपने बेटे के वापस ला सके।
उत्तरप्रदेश के बरेली में मजदूर हरस्वरूप अपने परिवार के साथ रहता है। वह मेहनत मजदूरी कर अपनी पत्नी और दो बच्चो का पालन पोषण करता था। कुछ दिनों पहले वह उत्तराखण्ड के खटीमा में मजदूरी करने के लिए गया था। वहां उसके ऊपर एक मकान की दीवार गिर गई। इसमें उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। उसके साथ काम कर रहे अन्य मजदूरों ने जैसे-तैसे उसे घर पहुंचाया। वहां डाक्टरों ने हाथ खड़े करते हुए उसे दिल्ली या फिर लखनऊ के अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दे दी। अब दिल्ली और लखनऊ के अस्पताल में इलाज और परिवार के भरण पोषण में रुपये की समस्या उसके सामने खड़ी हो गई।
15 दिन पूर्व उसकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया। पहले से ही दो बेटों का पहले पालन पोषण और अपने इलाज के लिए रुपये नहीं होने से परेशान हर स्वरूप ने नवजात बेटे को बेचने का फैसला कर लिया। मजबूर पिता ने एक ग्रामीण को 42 हजार रुपये में अपने 15 दिन के बेटे को बेच दिया।



