
महाभारत सबसे बड़ा काव्य माना जाता है जब भी महाभारत का नाम लिया जाता है तो एकाएक दिमाग में लाखों शूरवीरों की आहुति याद आ जाती है युद्ध में बहुत से शूरवीरों ने अपने प्राणों के आहुति दी थी। यह एक ऐसा युद्ध जिसने कुरुक्षेत्र की धरती को रक्त-रंजित कर दिया था। इतना खून बहा था कि आज भी वहां की मिट्टी का रंग लाल ही है।
लेकिन एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है, जो बहुत सोचने को मजबूर करता है। अगर वाकई ये सब सच है तो उन शवों का क्या हुआ… जिन लोगों ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपने प्राण गवाए थे उनके शवों का अंतिम संस्कार कैसे हुआ…? जानकारों और इतिहासकारों के कुछ ऐसे अनुमानित तत्थ्य हैं जो एक नई सोच के साथ इनके बारे में सोचने को मजबूर करते हैं।

इतिहास में मिलता है रामसेतु का प्रमाण
श्रीराम ने रामसेतु का निर्माण करवाया था, इस तथ्य के साक्ष्य के रूप में वैज्ञानिकों को वह पुल मिला। लेकिन महाभारत का वो भयंकर युद्ध वाकई घटित हुआ था जिसका कोई भी प्रमाण आज तक हासिल नहीं हुआ।
कुरुक्षेत्र
इतिहासकारों का मानना है कि शायद कुरुक्षेत्र के युद्ध में मारे गए सैनिकों और योद्धाओं के शव या अस्थियां इसलिए हासिल नहीं हुआ होगा क्योंकि आज के दौर में भले ही मारे गए दुश्मन के शव का दुर्व्यवहार किया जाता हो लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था।
महाभारत का युद्ध
इतिहासकार अनुमान लगाते हैं कि नियमनुसार महाभारत का युद्ध दिन ढलते ही रोक दिया जाता था तो जिस दिन लोगों के शव भूमि पर गिरते थे उनका उसी दिन अंतिम संस्कार कर दिया जाता होगा या फिर उनके शवों को उनके परिवार को सौंप दिया जाता होगा और अंतिम संस्कार के बाद तो सिर्फ राख ही बचती है।

कुरुक्षेत्र की भूमि
अमल नंदन, कुरुक्षेत्र के पौराणिक इतिहासकार, का कहना है कि उत्तरायन के दिन जब भीष्म पितामाह ने अपनी अंतिम सांस ली थी, उस दिन युद्ध समाप्त हो गया था जिसके बाद कुरुक्षेत्र की भूमि को जला दिया गया था ताकि हर मृत योद्धा को स्वर्ग में जगह मिले और उनके शवों का शुद्धिकरण हो जाए।
महाभारत की घटना कल्पनाओं का परिणाम
महाभारत के युद्ध में ऐसा बहुत कुछ हुआ था जिस पर विश्वास करना बहुत कठिन है। शायद इसीलिए आज भी लोग इसे कल्पनाओं का परिणाम ही मानते हैं।



