
आज यानि शुक्रवार को गंगोत्री धाम के कपाट सुबह 11ः40 पर विधि विधान पूजा अर्चना के साथ देश शीतकाल के लिए बंद कर दिये गए हैं।
बता दें कि सुबह 11ः55 पर माँ गंगा की उत्सव डोली भक्तों के जलसे के साथ अपने मायके मुखबा के लिए रवाना हुई। गंगोत्री से चलने वाली ये पैदल यात्रा आज रात्री निवास देवी मंदिर में करेगी और अगले दिन 1 बजे वहां से प्रस्थान कर गंगा के शीतकालीन पड़ाव मुखवा में पहुंचेगी ।
बताते चलें कि शीतकाल के 6 महीने माँ गंगा की पुजा अर्चना मुखबा में ही सम्पन्न होती है। मुखबा में भी गंगोत्री जैसा ही मंदिर बनाया गया है। दिवाली के अगले दिन अन्नकूट के पावन पर्व पर विधि विधान पूजा अर्चना के साथ नियत मुहूर्त पर गंगा की भोग मूर्ति मंदिर से बाहर निकाल दी जाती है और फिर उत्सव डोली हजारों भक्तों की मौजूदगी में मुखबा के लिए रवाना होती है।

रावल ने बताया कि गंगा मंदिर मे अखंड दीप में 6 महीने के लिए तेल भर दिया जाता है, और कपाट बंद कर दिये जाते हैं। 6 महीने के बाद जब मंदिर के कपाट खुलते हंै तो इस अखंड ज्योतों के दर्शन का बड़ा ही महत्व माना गया है।



