महिलाएं किसी से कम नहीं है, ये कहावत अगर हकीकत में तब्दील होते देखनी है तो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जिले की कमान संभाल रही महिला कप्तान निवेदिता कुकरेती को देखा जा सकता है। उत्तराखंड में नई सरकार आने के बाद पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल हुआ है और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी निवेदिता को देहरादून कप्तान बनाया गया है।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी निवेदिता कुकरेती महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है। निवेदिता कुकरेती को देहरादून में लेडी सिंघम के रूप मे जाना जाता है। दिखने में सीधी-सादी, लेकिन अपने काम में है दबंग। वैसे तो पुलिस बल में पुरूषों का ही वर्चस्व है। राज्य में अधिकतर महिला पुलिस अधिकारियों को बड़े फील्ड की पोस्टिंग से दूर ही रखा जाता है। लेकिन 2008 बैच की आईपीएस अधिकारी निवेदिता ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा अजमेर से प्राप्त की। दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए और एमफिल की डिग्री हासिल के बाद 2008 में उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ।
हरिद्धार एसपी रही पहली पोस्टिंग

निवेदिता की फील्ड की पहली पोस्टिंग हरिद्वार के एसपी के रूप में हुई इसके बाद निवेदिता को बागेश्वर जिले के एसपी का पदभार सौंपा गया। बागेश्वर में कार्यरत निवेदिता के समक्ष एक बड़ी चुनौती तब आई जब 2013 में ग्लेशियर के बीच कुछ विदेशी फंस गए। यह समय निवेदिता के लिए चुनौती और खुद को साबित करने वाला था। निवेदिता ने खुद मौके पर मौजूद रहकर रेस्क्यू टीम का निर्देशन किया। एसपी पौड़ी के रूप में निवेदिता ने नशे तथा वन्यजीव तस्करों के शिकंजा कसा। पौड़ी में निवेदिता को नशे के खिलाफ जीत तब हासिल हुई जब उन्होंने चाची नाम की एक ड्रग तस्कर को गिरफ्रतार किया। ड्यूटी के साथ निवेदिता ने पौड़ी जिले में सामाजिक सरोकारों तथा महिला सशक्तिकरण के लिए भी सराहनीय कार्य किया। निवेदिता ने ग्रामीण युवतियों को शिक्षित बनाने के साथ-साथ स्वावलम्बी बनने के लिए प्रोत्साहन दिया ताकि वह आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सके।
कप्तानी के साथ परिवार का फर्ज निभाना दोहरी चुनौती




