बड़ी खबर : उत्तराखंड सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि में से एक महिला कॉपरेटिव बैंक की आज से शुरुआत हो गई है..महिला सशक्तिकरण के युग में उत्तराखंड सरकार की ये पहल बैकिंग सेक्टर में एतिहासिक नजीर के तौर पर देखी जा रही है। उत्तराखंड के पहले महिला काॅपरेटिव बैंक की शुरुआत देहरादून के बंजारावाल इलाके से हुई है। यहाँ सिर्फ बैंक स्टाफ महिला रहेगी जबकी खाता कोई भी खुलवा सकता है . बुधवार को सीएम त्रिवेंद्र ने इस बैंक का उद्घाटन किया। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अगले 1 साल में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सहकारी बैंक पूरी तरह से काम करना शुरु कर देंगे। त्रिवेंद्र सरकार की अबतक की उपलब्धियों में से सबसे बड़ी उपब्धि के तौर पर इसे देखा जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि महिला काॅपरेटिव बैंक की स्थापना के लिए उत्तराखंड सरकार ने इस महीने रक्षाबंधन के दिन फैसला लिया था।देहरादून से शुरुआत हुई प्रदेश के पहले महिला बैंक में सभी पदों पर महिलाकर्मी को तैनात किया गया है। करीब 5 जूनियर स्टाॅॅफ के साथ बैंक मेनेजर ने इसका संचालन शुरु कर दिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि राज्य के समावेशी विकास में सहकारिता बैंको और खासतौर से महिला बैंको की अहम भूमिका रहेंगी। उन्होंने ने उम्मीद जताई है कि यह महिला बैंक महिला सहकारिता के साथ सामाजिक सहकारिता बढ़ाने में भी उपयोगी साबित होगा…वंही सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि पूरे प्रदेश में अबतक 11 लाख लोग 300 से ज्यादा काॅपरेटिव बैंकों में अपना खाता खुलवा चुके है। जिसमें ढाई लाख खते महिलाओं के होंगे। अगले साल तक पूरे प्रदेश में राज्य सरकार ने 5 लाख खाते खोलने का संकल्प लिया है। सहाकारिता विभाग प्रदेश सरकार की सवा लाख बैंक खातों के लिए जिरो बैलेंस पर खोलने की घोषणा की है। मत्री धन सिंह रावत ने बताया कि पूरे प्रदेश में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना के तहत छात्राओं के ये खाते खोले जाएंगे।




