उत्तराखंड जंगलों की सुरक्षा के लिए विश्व बैंक ने 7 करोड़ प्रोजक्ट को मंजूर दी

उत्तराखंड में हर साल जंगल में आग के कारण सैकड़ों हेक्टेयर जंगल बर्बाद होता है। इसी साल फरवरी माह में फायर सीजन शुरू होने के साथ ही पहाड़ के जंगल धंधकने लगे हैं। हालांकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में बीच-बीच में बारिश हो जाने से जंगलों की आग इतनी अधिक खतरनाक नहीं हुई है, लेकिन खतरा फिर भी बरक़रार है। पिछले एक दशक में  पिछले साल रिकॉर्ड 4,400 हेक्टेयर के लगभग जंगल आग के कारण बर्बाद हो गया था ।

उत्तराखंड में जंगल को आग से बचने और वनीकरण के लिए विश्व बैंक ने उत्तराखंड के लगभग 700 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूर कर दिया है। उत्तराखंड में लगभग 71 फीसदी वन क्षेत्र है, लेकिन विकास कार्यो के चलते इस पर असर भी पड़ इस पर बुरा असर हो रहा है।

वन क्षेत्रों का घनत्व में भी गिरावट आ रही है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन भी बढ़ा है। इसके साथ ही सैकड़ों प्राकृतिक स्नेत बंद हो चुके हैं या फिर बंदी के कगार पर हैं। वनों सुरक्षा और वनीकरण के लिए मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया जिस पर वे विश्व बैंक के प्रतिनिधियों को प्रजटेंशन भी दे चुके हैं। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट को वन मंत्रलय के मार्फत आर्थिक मामलों के मंत्रलय को भेजा था। लगभग 700 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को मंत्रलय ने हरी झंडी दे दी है।

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