HomeUncategorizedम्यूजिक सुनते हुए वैसी ही खुशी महसूस होती है जैसी सेक्स प्लेजर!

म्यूजिक सुनते हुए वैसी ही खुशी महसूस होती है जैसी सेक्स प्लेजर!

नई दिल्लीः क्या आप म्यूजिक सुनते ही वैसी ही खुशी महसूस करते हैं जैसी सेक्स के दौरान होती है? ये पढ़कर बेशक चौंक जाएं कि ये कैसा सवाल है. लेकिन ये सच है कि म्यूजिक सुनते हुए लोगों को वैसी ही खुशी महसूस होती है जैसी सेक्स प्लेजर में. हाल ही में इस पर एक रिसर्च आई है.

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क्या कहती है रिसर्च-
रिसर्च के मुताबिक, ब्रेन का कैमिकल सिस्टम ओपिऑयड जिस तरह से सेक्स के दौरान उत्तेजित होता है वैसे ही आपका फेवरेट म्यूजिक सुनते हुए, टेस्टी फूड खाते हुए और पसंदीदा ड्रग्स लेते ही उत्तेजित होता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी के प्रोफसर डेनियल लेविटिन का कहना है कि ये पहला डेमोंस्ट्रेशन है जिसमें पाया गया है कि ब्रेन के कैमिकल म्यूजिकल प्लेजर में डायरेक्ट इन्वॉल्व होते हैं.

पहले भी हुई थी रिसर्च-
डेनियल के मुताबिक, इससे पहले डेनियल और उनके लैब के अन्य सदस्यों द्वारा की गई रिसर्च में न्यूरोइमैजिंग का इस्तेमाल किया गया था. इसमें ब्रेन के उन एरिया को देखा गया जो कि म्यूजिकल प्लेजर मोमेंट्स के दौरान एक्टिव हो जाते हैं. लेकिन शोधकर्ता इस रिसर्च में सिर्फ ओपिऑयड सिस्टम की मौजूदगी को ही भाप पाए थे.

कैसे की गई रिसर्च-
रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने सेलेक्टिड टेम्पिरेरी ब्रेन के ओपिऑयड सिस्टम को नल्ट्रेक्सोन (naltrexone) ड्रग की मदद से ब्लॉक कर दिया. ये ड्रग एडिक्शन डिस्ऑर्डर को ट्रीट करने के लिए बड़े लेवल पर इस्तेमाल की जाती है.

रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों को मेजर किया गया कि म्यूजिक के दौरान उनका क्या रिस्पांस होता है? रिस्पांस में पाया गया कि जब प्रतिभागी अपना फेवरेट सॉन्ग सुन रहे थे तो भी बहुत लंबे समय तक प्ले‍जर महसूस नहीं किया. लेकिन प्रतिभागियों ने जब अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया तो उनके इंप्रेशन फैसिनेटिंग थे.

रिसर्च के नतीजे-
कहने का मतलब ये है कि लोग जैसे एल्कोहल, सेक्स, फ्रेंडली गेम पोकर और कुछ अन्य चीजें करके एन्जॉय करते हैं, ये सब उनका एडिक्टिव बिहेवियर शो करती हैं जो कि उनकी लाइफ और रिलेशनशिप को नुकसान पहुंचाता है.

प्लेजर के लिए न्यूरोकैमिकल रूट्स को समझने की जरूरत है जो कि दशकों से न्यूरोसाइंड का अहम हिस्सा रहा है. बहरहाल, शोधकर्ताओं ने हाल ही में ऐसे टूल्स और मैथड डवलप किए हैं जिससे इंसानों पर रिसर्च की जा सके.

एक्सपर्ट राय-
डॉ. डेनियल का कहना है कि कॉलेज स्टूडेंट्स को हेल्थ रीजन के लिए हर बार प्रीस्क्रिप्शन ड्रग्स की जरूरत नहीं होती. स्टूडेंट्स को दवाएं देने से पहले उनके बीमार होने के पीछे का कारण जानना जरूरी है. 117 ऐसे प्रतिभागियों के ब्लड टेस्ट लिए गए जिन्हें कोई हेल्थ कंडीशन नहीं थी. इसमें देखा गया कि बिना किसी बीमारी के ड्रग्स के सेवन से इनकी कंडीशन वर्स्ट हो गईं थी.

ये स्टडी जर्नल साइंटिफिट रिपोटर्स में पब्लिश हुई थी.

Vision Desk 3
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