Chamoli News: उत्तराखंड के प्रसिद्ध सिख तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 10 अक्टूबर को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इस साल हेमकुंड साहिब में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और रिकॉर्ड संख्या में संगत ने पवित्र धाम में मत्था टेका। ट्रस्ट की ओर से कपाट बंद होने की तिथि को लेकर जानकारी साझा की गई है। कपाट बंद होने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हेमकुंड साहिब पहुंचने की संभावना है।
हेमकुंड घाटी में खिला ब्रह्मकमल
इन दिनों हेमकुंड घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। घाटी में कई तरह के रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हैं। वहीं, उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाला दुर्लभ ब्रह्मकमल भी अपनी खूबसूरती बिखेर रहा है। हेमकुंड ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे घाटी में मौजूद प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें और पर्यावरण की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।

15 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है धाम
हेमकुंड साहिब समुद्र तल से 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। सात बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों और पवित्र हिमानी झील के बीच स्थित यह धाम सिख धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है।
हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन पहाड़ी यात्रा पूरी कर यहां पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए आखिरी मौका
10 अक्टूबर को कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालुओं के पास इस वर्ष हेमकुंड साहिब के दर्शन करने का आखिरी मौका है। एक ओर जहां यात्रा अपने समापन की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर हेमकुंड घाटी में खिले फूल और ब्रह्मकमल इस आध्यात्मिक यात्रा को प्राकृतिक सुंदरता से भी खास बना रहे हैं।
यात्रा के सफल संचालन में कई विभागों का योगदान
हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष ने यात्रा के सफल संचालन में सहयोग के लिए उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, सेना, सेवादारों और संगत का आभार जताया।यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में विभिन्न विभागों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।