ऋषिकेश: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद वन विभाग ने सर्वे में चिन्हित वन भूमि पर तारबाड़ लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन जैसे ही ये काम शुरू हुआ, विरोध भी तेजी से सामने आने लगा। फिलहाल विरोध के बढ़ते दबाव के कारण तारबाड़ का कार्य रोकना पड़ा।
स्थानीय लोगों का दावा—दशकों से कर रहे हैं खेती
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि ये जमीन उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी है और उन पर पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय से खेती की जा रही है। इसलिए, उनके मुताबिक इस भूमि पर वन विभाग का कब्जा स्वीकार करना उचित नहीं है।
इसके साथ-साथ महिलाओं की बड़ी संख्या भी विरोध में आगे दिखाई दी। उन्होंने नारेबाजी करते हुए वन विभाग की कार्रवाई और सरकारी रवैये के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। इसी बीच, जैसे ही तारबाड़ लगने का काम शुरू हुआ, तुरंत ही विरोध तेज हो गया और काम को रोकना पड़ा।
प्रशासन का रुख–विरोध उचित नहीं
इसी मामले पर एसडीओ अनिल रावत ने बताया कि एक दिन पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सहयोग मांगा गया था और स्पष्ट किया गया था कि पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हो रही है। उनके मुताबिक लगातार विरोध करना उचित नहीं है। फिर भी, इसके बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और विरोध जारी है।
प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन करना अनिवार्य है, इसलिए सहयोग की अपेक्षा की जा रही थी, लेकिन हालत इसके उलट जाते हुए दिख रहे हैं।


