उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा का उत्तराखंड दौरा, अंकिता भंडारी, मनरेगा और कई मुद्दों पर हुई बातचीत

देहरादून: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी कुमारी सैलजा ने आज उत्तराखंड दौरे पर पत्रकारों से बातचीत की। जिसमे उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा की मूल भावना और आत्मा को समाप्त करना चाहती है। और ये केवल योजना का नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि लोगों के अधिकारों का हनन है।

उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा का उत्तराखंड दौरा

कुमारी सैलजा ने कहा कि मनरेगा पहले मांग-आधारित रोजगार का कानूनी अधिकार था, जिसमें सरकार काम देने के लिए बाध्य थी। लेकिन अब प्रस्तावित नए प्रावधान इसे आपूर्ति-आधारित योजना में बदल देते हैं। जहां रोजगार केंद्र सरकार द्वारा तय बजट और मानकों पर निर्भर होगा। इससे पंचायतों के अधिकार सीमित होंगे और विकेंद्रीकरण की व्यवस्था प्रभावित होगी। साथ ही श्रम लागत वहन का अनुपात बदलने से राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका है।

मनरेगा का नाम बदलने के साथ ही अधिकारों का हनन

सैलजा ने आरोप लगाया कि नया कानून राज्यों को चरम कृषि मौसम में 60 दिन तक काम रोकने की अनुमति देता है, जिससे मजदूरों की सौदेबाजी क्षमता कम होगी और वो मजबूर होकर जमींदारों पर निर्भर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले ये रोजगार गारंटी योजना थी। लेकिन अब इसे “रोजगार न मिलने की गारंटी” बनाया जा रहा है।

कांग्रेस पूरे देश में शुरू करेगी जनजागरूकता अभियान :कुमारी सैलजा 

इसके आलावा उन्होंने बताया कि इन बदलावों के विरोध के लिए कांग्रेस पूरे देश में चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी। इसके तहत ड्राफ्ट और पंपलेट तैयार कर स्थानीय भाषाओं में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। 10 जनवरी को जिलेवार प्रेस वार्ताएं, 11 जनवरी को धरना और 12 जनवरी से 29 फरवरी तक पंचायत स्तर पर चौपालों का आयोजन किया जाएगा।

कुमारी सैलजा का अंकिता भंडारी प्रकरण पर कड़ा रुख

अंकिता भंडारी हत्याकांड के हालिया खुलासों पर उन्होंने कहा कि पूरा देश स्तब्ध और आक्रोशित है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से कराने की घोषणा नहीं होती, कांग्रेस पार्टी शांत बैठने वाली नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा

उन्होंने बताया कि आज प्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें प्रमुख रूप से मनरेगा और अंकिता भंडारी प्रकरण शामिल रहे। बैठक में सभी नेताओं ने प्रदेशव्यापी जनआंदोलन को लेकर रणनीति भी तय की।

 

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