नैनीताल – सरोवर नगरी के नाम से विश्व विख्यात नैनीताल शहर को आज 180 वर्ष पूरे हो गए है। नैनीताल के स्थानीय लोग नैनीताल का केक काटकर इस दिन को धूमधाम से मनाते हैं।
बता दें कि नैनीताल की खोज को लेकर दो अलग अलग मत हैं। कुछ लोग नैनीताल की नवम्बर 1841 में अंग्रेजो द्वारा खोज बताते हैं तो कुछ इतिहासकार इसका जिक्र स्कन्द पुराण में होने की बात कहते हैं। उनका कहना है की पुराण काल में इसे तीर्थ के रूप में जाना जाता था, स्कन्द पुराण में इसका त्रिऋषि सरोवर के नाम से उल्लेख मिलता है।
कहा जाता है की अत्रि, पुलस्त्य और पुलह ऋषियों ने यहाँ मानसरोवर को ध्यान कर अपने तपोबल से सरोवर का निर्माण करा था, वही एक लोककथा के अनुसार माता पार्वती के सती होने के दौरान पर उनकी आँख यहाँ गिरी थी जिस कारण इसे नैनीताल का नाम से भी जानने लगे।
कालान्तर में नैनीताल की लगातार लोकप्रियता बढ़ती गई और यहाँ अच्छी खासी बशासत भी जम गई। इतिहासकारों के अनुसार 18 नवम्बर 1841 को पीटर बैरन ने नैनीताल पहुंचकर इस खूबसूरत वादी को पहली बार देखा था। बताया जाता है की यहाँ से आगरा लौटने के बाद पीटर ने इस जगह की सुंदरता के बारे में एक अखबार में लिखा था।
उन्होंने ये भी जिक्र किया था की हर किसी व्यक्ति ने एक बार नैनीताल को देखने के लिए जरूर जाना चाहिए। नैनीताल का मौसम बहुत सुन्दर है। यहाँ गर्मियों में तापमान अधिकतम 30 डीग्री तक जाता है और दिसंबर से फरवरी तक यहाँ बर्फ़बारी होती है। जुलाई से सितम्बर माह तक यहाँ जमकर बरसात होती है।
कार्यक्रम में नैनीताल की खुशहाली एवं अमन चयन के लिए हवन किया गया। इसके साथ ही हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध एवं अन्य धर्मों द्वारा भी नैनीताल की दीर्घायु के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। जिसके तत्पश्चात नैनीताल विधायक एवं अतिथिगणों ने 52 से अधिक केक काटकर जन्मोत्सव मनाते हुए नैनीताल की आम जनमानस को बधाई दी!