Saturday, February 28, 2026
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12 वर्षीय सुभम ने हैरत में डाला वैज्ञानिकों को !

कुलदीप राणा,रुद्रप्रयाग:  कहते हैं प्रतिभा किसी उम्र की मौहताज नहीं होती है। बस जरूरत होती है तो उसे परखने और सवारने की। रुद्रप्रयाग के गुलाबराय निवासी 12 वर्षीय सुभम काला ने छोटी सी उम्र में बड़ी सोच और उसे व्यावहार में उतारने का बेहतरीन प्रदर्शन का नमूना दिखाया है। डेम जैसे प्रोजेक्ट बनाने के लिए जहां वैज्ञानिकों के पसीने छूट जाते हैं वहीं इस बालक की नाजुक सोच ने इतनी दृढ़ काम करने का दुःसाहस किया जो वास्तव में काबिले तारीफ है।
एक ओर जहाँ अपने बच्चों को इंजीनियर डाॅक्टर आदि बड़े पद और रुतबे की नौकरियों के लिए मंहगी फीस देकर बड़े-बड़े शहरों में मंहगे कोर्ष करवाते हैं वहीं आज भी पहाड़ के ग्रामीण अंचलों में न जाने ऐसी कितनी प्रतिभायें हैं जो धन के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे ही प्रतिभा जनपद रुद्रप्रयाग के गुलाबराय में देखने को मिलती है जहां कक्षा 7 में पढ़ने वाला 12 वर्षीय सुभम किताबी ज्ञान के आधार पर विद्युत उत्पादन के डेम जैसे बड़े प्रोजेक्ट का नमूना अपने अल्प संसाधनों में तैयार किया है। प्लास्टिक की बाल्टी से पाईप द्वारा थर्माकाॅल की नहर से पानी द्वारा छोटी सी मोर्टर ट्रावाहिन के माध्यम से बिजली उत्पादन कर रहा है। वहीं डेम केे ऊपर से गुजरने वाले राजमार्ग का नक्सा भी बेहतरीन बनाया है। साथ ही सफाई करने वाला इलेक्ट्रानिक वैक्यूम क्लीनर और थार्मकाॅल आदि की कटिंग के लिए कटर मीशीन और विभिन्न इलेक्ट्रानिक शो-पीस सामग्री भी तैयार किए हैं ।

सुभम काला ने अपने इस प्रोजेक्ट को अपने स्कूल में विज्ञान के अध्यापकों को दिखाया तो अध्यापक भी इस प्रोजेक्ट को देखकर हक्के बक्के रह गए। लेकिन सुभम की इस प्रतिभा को उचित मंच न मिलने से उसके माता पिता भी अपने आप को असाह जैसा महसूस कर रहे हैं। मां गृहणी तो पिता चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दो भाई बहिनों में सबसे छोटा सुभम की यह जिज्ञासा संसाधनों और उचित मंच न मिलने के कारण अपने मकसद में फलीभूत नहीं हो पा रही है।

जहां सरकारें विद्युत जैसे प्रोजेक्ट माॅडल बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च करती हैं। वहीं छोटी सी उम्र में सुभम काला अल्प संसाधनों में अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर सरकारों को अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। हमारी सरकारों को चाहिए कि वे ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ने के लिए विद्यालयों से ही आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें। ताकि सुभम जैसे छात्रों भी डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिक बन सकें।

 

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