
दरअसल उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एक सरकारी स्कूल में विज्ञान के शिक्षक कम पड़ रहे थे. बच्चों को पढ़ाई करने में दिक्कत आ रही थी. डीएम ने यह समस्या अपनी पत्नी को बताई. उनकी पत्नी ने बच्चों की इस समस्या का समाधान निकालने का फैसला किया और खुद स्कूल में बच्चों को विज्ञान पढ़ाने का जिम्मा उठा लिया.
बड़ी बात यह है कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि वहां का डीएम है. डीएम मंगेश की पत्नी ने खुद बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी उठाई है. डीएम मंगेश अपनी ईमानदार छवि और सामाजिक कार्यो के लिए जाने जाते हैं स्थानीय लोग इनके काम से काफी खुश रहते हैं और हमेशा उनकी तारीफों के पुल बांधते रहते हैं .

बता दें कि सिविल सेवा 2011 में मंगेश ने चौथा रैंक हासिल किया था. इतनी अच्छी रैंक हासिल करने के बाद उनके पास बाहर जाने का भी मौका था लेकिन उन्होंने अपने देश को प्रथम स्थान देते हुए यहीं रहकर लोगों की सेवा करने की ठानी. ऐसे अफसरों की हमारे देश को बहुत ज़रुरत है और ऐसी सोच रखने वालों को हम सलाम करते हैं.



