श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए देहरादून के मंदिर सज गए हैं। श्री कृष्ण के मंदिरों को भव्य ढंग से सजाया गया है। इस वर्ष स्मार्थ अर्थात् गृहस्थी 23 और साधु संत 24 अगस्त को व्रत रखेंगे। गृहस्थी शुक्रवार को दिन भर व्रत रखकर रात्रि को चंद्र पूजन अर्घ्य दान कर व्रत का पारायण कर सकेंगे। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि लगभग सभी भारतीय पंचागों में अष्टमी तिथि 23 अगस्त की सुबह 8.11 से शुरू हो रही है जो शनिवार सुबह 8.40 तक रहेगी।
दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र
वहीं रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त की रात्रि 11:46 से शुरू होकर 25 अगस्त सुबह 4:17 तक रहेगा। भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में रात्रि 12 बजे हुआ था, इसलिए दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी का व्रत रखने से मनुष्य के पापों का नाश होता है। मन में सरस्वती का वास होता है और घर में धन धान्य की बरकत होती है।
जन्माष्टमी का महत्व
कंस के अत्याचार से परेशान गृहस्थ धर्म के लोगों ने मथुरा में पहले से व्रत रखा था। भगवान श्रीकृष्ण का रात्रि को जब जन्म हो गया तो उन्होंने दूसरे दिन उत्सव मनाया। जबकि संतों और महात्माओं की समाधि भगवान के जन्म पर टूटी, इसलिए उन्होंने दूसरे दिन इस व्रत को रखा। इसे व्रत राज भी कहा जाता है।
मन वांछित फल प्राप्ति के लिए कैसे करें राशि अनुसार पूजन
घिल्डियाल बताते हैं कि विभिन्न राशि के लोगों को अलग-अलग सामग्री से भगवान कृष्ण का पूजन करना चाहिए।मेष राशि के लोग मोर पंख एवं बूंदी के लड्डू, वृषभ राशि के लोग मक्खन और मिश्री से, मिथुन राशि वाले सफेद तिल के लड्डू से, कर्क राशि के लोग दूध और दही से, सिंह राशि वाले पीले फूल से, कन्या राशि के लोग दूध-दही से, तुला राशि वाले सफेद फूल और तुलसी से, वृश्चिक राशि के लोग लाल फूलों से, धनु राशि वाले गोधूम चूर्ण और पीले फूलों से, मकर राशि वाले लोग काले तिल और गुड़हल के फूलों से, कुंभ राशि वाले बांसुरी, मोर पंख एवं काले तिलों से और मीन राशि के लोग गोधूम चूर्ण, पीले फूल तथा फलों से भगवान का पूजन पूजन करें तो मन वांछित फल की प्राप्ति होगी।



