
देहरादून। रिस्पना को ऋषिपर्णा बनाने का महत्वाकांक्षी अभियान प्रारंभ हो गया है। इस योजना का शुभारंभ वृक्षारोपण के लिए गड्ढे खोद कर किया गया, जिसमे हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। देहरादून के बीचों बीच बहने वाली रिस्पना कभी कल-कल छल-छल बहती हुई नदी थी, लेकिन आज अपना अस्तित्व ही नहीं बचा पा रही है। इसे फिर से पुराने स्वरूप में जाने का अभियान प्रारंभ किया गया है। मसूरी से मोथरोवाला तक लगभग 30 किलोमीटर लंबी इस नदी के पुनर्जीवन के लिए नए भगीरथ की तरह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रयासरत है। दो चरणों में चलाये जाने वाले रिस्पना पुनर्जीवन अभियान के तहत पहले चरण में ढाई लाख पौधे रोपे जाएंगे। 15 जुलाई को पौधारोपण किया जाएगा। उसके पहले ढाई लाख गड्ढे खोदने का काम प्रारंभ किया गया है। इस काम में सेना, सिविल डिफेंस, सामाजिक संगठन व विद्यालयों के बच्चों के साथ-साथ भारी संख्या में समाजसेवियों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री मानते हैं कि काम कठिन तो है लेकिन असंभव नहीं। उन्होंने गढ़वाल की रिस्पना और कुमाऊं की कोसी नदियों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है जो अपने आप में किसी वरदान से कम नहीं है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ भारी संख्या में लोग उपस्थित थे और सबने इस कार्यक्रम में सहयोग दिया। मंचासीन अतिथियों में महापौर विनोद चमोली, स्वामी चिदानंद मुनि, विनय गोयल तथा भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता कार्यकम में उपस्थित थे। सबने संकल्प लिया कि वे रिस्पना को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



