गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने वाले विधेयक पेश किया। कश्मीर घाटी में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन बढ़ाए जाने को लोकसभा से मंजूरी मिल गई है। विधेयक को लोकसभा में शुक्रवार को पेश किया गया था। जिसपर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने विरोध दर्ज किया था। राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार विधेयक को पास करवा पाती है या नहीं। फिलहाल इस मुद्दे पर राज्यसभा में बहस चल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक टीएमसी राज्यसभा में जम्मू कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल 2019 और राज्य में राष्ट्रपति शासन बढ़ाए जाने को समर्थन देगी।
वहीं सपा के सांसद रामगोपाल यादव ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए कहा कि अब कल राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म हो जाएगी। राज्य में कल चुनाव हो नहीं सकते, ऐसे में सरकार ने ऐसी परिस्थिति पैदा करती है कि राष्ट्रपति शासन के प्रस्ताव को समर्थन करने के सिवाए कोई चारा नहीं है।
बसपा के सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं क्योंकि इसकी अवधि खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर चाहेगी तो जम्मू कश्मीर में चुनाव हो जाएंगे, ऐसा नहीं हो सकता कि सरकार आयोग से विनती करे और उसकी बात न मानी जाए। मिश्रा ने कहा कि कश्मीर के हालात आतंकवाद की वजह से बिगड़े हैं क्योंकि वहां की आवाम शांति चाहती है। बसपा सांसद ने जम्मू कश्मीर आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों की भी वापसी होनी चाहिए।
वाईएसआरसीपी के सांसद विजयसाई रेड्डी ने राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि अगर आज राष्ट्रपति शासन की अवधि को नहीं बढ़ाया गया तो राज्य में समस्या पैदा हो जाएगी, क्योंकि इसकी मियाद खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी जम्मू कश्मीर आरक्षण बिल का भी समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि आरक्षण बिल के साथ नौकरियों की संख्या में इजाफा होना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके।
राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर के हालात के लिए कांग्रेस की गलत नीतिया जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर को एक इकाई के तौर पर देख रही है और हम बांटने का काम नहीं करते हैं। आबादी कम होने के बावजूद कश्मीर में लोकसभा और विधानसभा की सीटें ज्यादा रखी गई हैं। अपने हितों को साधने के लिए औने-पौने दाम पर जमीन बांटी गईं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर को 80 हजार करोड़ की परियोजना दी गई और कई विकास योजनाएं चल रही हैं। कश्मीर मसले को पूरी दुनिया में गलत तरीके से पेश किया गया। पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद के कारण पूरे कश्मीर को कटघरे में खड़ा किया गया। सिन्हा ने कहा कि संविधान सभा में धारा 370 के लिए अंतरिम शब्द का इस्तेमाल किया गया और फिर इसे अस्थाई कर दिया गया। कांग्रेस पहले खुद इसे हटाना चाहता थी लेकिन अब इसका विरोध कर रही है। 44 दिन जेल में रहने के बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई और उनकी मांग गलत नहीं थी। कश्मीर को बदलना है तो उसे राजनीतिक चश्मे से देखना बंद करना होगा। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई बच्चे अनाथ हो गए हैं उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है।



