मल्टी प्लेक्स कर रहे हैं निजता का हनन


देहरादून। आरटीआई क्लब उत्तराखंड का मानना है कि मल्टी प्लेक्सों में तैनात कर्मचारियों द्वारा असंवैधानिक रूप पुरुषों और महिलाओं के पर्स की तलाशी ली जाती है जिससे उनकी निजता का हनन होता है। यह आरोप संगठन के आर एस धुंता ने लगाया है। एसपी देहरादून को लिखे एक पत्र में श्री धुंता ने कहा है कि तलाशी लेने के लिए इन मल्टी प्लेक्स कर्मचारियों द्वारा पुलिस और गृह विभाग से कोई अनुमति नहीं ली है। महिलाओं के पर्स आदि में इनकी कीमती चीजों के अलावा कुछ निजी वस्तुएं भी होती हैं जिनसे उनकी निजता का हनन होता है। ऐसी वस्तुओं का प्रकटीकरण सबके सामने नहीं किया जाता लेकिन मल्टी प्लेक्सों में ऐसा हो रहा है। कीमती वस्तुओं की तलाशी लेने वाला कर्मी उसकी सूचना किसी अन्य व्यक्ति को भी दे सकता है जिसके कारण महिला के साथ-साथ फिल्म देखने आये उसके परिजनों को भी समस्या तथा अनहोनी का सामना करना पड़ सकता है और उनके जान माल की क्षति हो सुकती है।
श्री धुंता ने पुलिस अधीक्षक से आग्रह किया है कि यह प्रकरण काफी गंभीर है तथा इस संदर्भ में जनहित में मल्टी प्लेक्स में बैग, पर्स की तलाशी लेने पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाया जाए। यदि किसी पर शंका होती है तो ऊपरी तौर पर उसकी तलाश ली जाए ताकि निजता का हनन भी न हो और घटना भी न घटे। इस संदर्भ में गृह अनुभाग उत्तराखंड शासन से उन्होंने पत्राचार भी किया था जिसमें रणजीत सिंह उप सचिव गृह विभाग की ओर से कुसुम मलेठा लोक सूचना अधिकारी द्वारा जो सूचना अवगत कराई गई है उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि इन संगठनों में काम कर रहे कर्मचारियों को ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई है। इस संदर्भ में तीन बिन्दुओं पर मांगी गई सूचना पर स्पष्ट कर दिया गया है कि मल्टी प्लेक्स अथवा निजी व्यवसायिक, मनोरंजन संस्थानों की व्यक्तिगत सुरक्षा जांच से संबंधित कोई नियमावली सूचना गृह अनुभाग-2 में धारित नहीं है। श्री धुंता का कहना है कि यह मल्टी प्लेक्सों को अधिकार नहीं है कि वह इस तरह की तलाशी ले सके।

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