
भगवान शिव को समर्पित टपकेश्वर मंदिर देहरादून के प्राचीन मंदिरों में से एक है। एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बने इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है। मंदिर में स्थित शिवलिंग पर चट्टानों से लगातार पानी की बूंदे टपकती रहती हैं जिसके कारण इस मंदिर का नाम टपकेश्वर मंदिर पड़ गया। वैसे तो यह मंदिर हर रोज खुला रहेता है और भक्तो का ताँता लगा रहता है लेकिन शिवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ एक बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देश भर से श्रद्धालु यहाँ उत्सव में शामिल होने तथा भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के इतिहास की बात करें तो इससे एक पौराणिक घटना जुड़ी है। धार्मिक ग्रंथ महाभारत के अनुसार “एक समय इस गुफा में कौरव और पांडवों के गुरु (द्रोणाचार्य) निवास करते थे। उस समय गुरु द्रोणाचार्य पुत्र (अश्वथामा) के लिए न तो गाय खरीदने में सक्षम थे और ना ही गाय का दूध, तब अश्वथामा ने भगवान शिव से प्रार्थना की। उनके प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें शिवलिंग से बूंद द्वारा दूध पिलाया।

होती है हर मुराद पूरी:- आप भी अगर शिव भगवान के भक्त हैं और शिव मंदिर जाना पसंद करते हैं तो आपको एक बार देहरादून के टपकेश्वर मंदिर में जरूर जाना चाहिए. खुबसूरत वातावरण में बसा हुआ टपकेश्वर मंदिर आपको निश्चित रूप से असीम शांति प्रदान करेगा. स्थानीय लोगो की माने तो इस मंदिर में बड़ी से बड़ी बिमारियों का ईलाज शिव की कृपा से हो जाता है.
शिवलिंग पर हर वक्त गिरता रहता है पानी :- मंदिर में शिवलिंग के ऊपर चट्टान से पानी बूंद-बूंद कर टपकता रहता है. पहले यह शिवलिंग काफी बड़ी गुफा के अन्दर था लेकिन समय के साथ-साथ गुफा खत्म हो रही है. मंदिर की शक्ति के बारें में आज भी लोग बताते हैं कि यहाँ अगर कोई घंटा-आधा घंटा बैठकर शिव भगवान से प्रार्थना करता है तो उसकी हर इच्छा पूरी हो जाती है.
मंदिर का रहस्य:- मंदिर के कई रहस्य हैं और मंदिर के निर्माण के ऊपर भी कई तरह की बातें होती रहती हैं. कुछ लोगो का कहना है कि यहाँ मौजूद शिवलिंग स्वयं से प्रकट हुआ है तो वहीं कुछ लोग बताते हैं कि पूरा मंदिर ही स्वर्ग से उतरा है. लेकिन जानकार बताते हैं कि द्रोणाचार्य ने ही यहाँ शिवलिंग को सबसे पहले खोजा था. मंदिर का निर्माण कब और किसने कराया इसके सिद्ध प्रमाण नहीं है.




