भ्रष्टों का सम्मान, योग्यों का अपमान विभाग की पहचान

भेषज विकास इकाई स्थानान्तरण नीति बनी चूं-चूं का मुरब्बा

देहरादून। भेषज विकास इकाई में स्थानान्तरण नीति को चूं-चूं का मुरब्बा बना दिया गया है। इसके प्रावधानों को तोड़-मरोड़ कर नियम विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है। उद्यान विभाग के अंतर्गत मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा एक नया कारनामा कर सूची प्रदर्शित कर दी गई जिसके लिए जिम्मेदार राजीव कुमार है, जिनका मूल पद रुद्रप्रयाग के लिए स्वीकृत है तथा प्रगति निरुपक के रूप में कार्यरत है। राजीव कुमार द्वारा सरकार की नीतियों को पलीता लगाया जा रहा है। इसके पीछे आर्थिक प्रलोभन भी माना जा रहा है। विभाग के कुछ कर्मचारियों है जिन्होंने अधिकारियों को गुमराह करके अवैध समिति गठित कराकर लोगों को बरगलाने का काम किया है।

जानकारों की माने तो भेषज विकास इकाई में राजीव कुमार द्वारा स्थापना पटल पर रहते हुए अनेक  कार्मिकों को नियम विरूद्ध स्थानान्तरण कराए गए, एसीपी का लाभ दिलवाया गया तथा नियुक्ति करवाई गई। इसका उदाहरण इस बात से लिया जा सकता है कि ओमकार सिंह अतिरिक्त जिला भेषज अधिकारी रुद्रप्रयाग को नियम विरूद्ध देहरादून मुख्यालय में तैनात करवाते हुए निर्वाचन एवं भेषज  संघ पटल आवंटित किया गया। जिसके लिये वह सर्वथा अनुपयुक्त  थे। ओमकार सिंह के निलंबन की समाप्ति पर धनराशि वसूली के साथ-साथ भविष्य में वित्त संबंधी कोई महत्वपूर्ण कार्य न दिये जाने संबंधी टिप्पणी प्रविष्ट पंजिका में अंकित की गई थी। इसके बावजूद विभाग द्वारा अनेक बार जांच करने पर उन्होंने धनराशि जमा कराई। वर्ष 2011 में डॉ. एसएस मिश्रा एवं डॉ. एसवी पांडे द्वारा इनके घोटालों की जांच की गई थी जिसमें ओमकार सिंह को 16766 रुपये की वसूली तथा विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि की संस्तुति की गई थी। कर्मचारियों की मिलीभगत सिंह से ओमकार सिंह द्वारा 11025 की धनराशि ट्रेजरी चालान द्वारा जमा की गई। किन्तु राजीव कुमार द्वारा प्रतिकूल प्रविष्टि न अंकित कर उन्हें पुरस्कार स्वरूप मुख्यालय बुलाया गया। राजीव कुमार के उत्तरकाशी कार्यकाल के दौरान भेषज इकाई की जमीन पर अतिक्रमण करवाया गया। स्थानान्तरित होने पर आवंटित शासकीय भवन खाली नहीं किया गया और मकान भत्ता भी लिया जाता रहा।

राजीव कुमार द्वारा विधानसभा के प्रथम सत्र 2008 को चतुर्थ सोमवार को निर्धारित तत्कालीन विधानसभा सदस्य केदार सिंह द्वारा पूछे गये तारांकित प्रश्न पर आश्वासन समिति को दिये गये आश्वासन के विपरित कई कार्मिकों का सुगम से दूर्गम और दुर्गम से सुगम नियम विरुद्ध स्थानान्तरण किया गया जो  विशेषाधिकार हनन का प्रकरण है। इनमें श्री फूलोरिया, रवि यादव, देवेंद्र सिंह ज्येष्ठा, चंद्रवीर, सभी वर्गीकरण पर्यवेक्षक थे जिनके पद सीमांत जनपदों हेतु सृजित किए गए थे पर नियम विरुद्ध बिना स्वीकृत पद के इनके स्थानान्तरण सुगम जनपदों में किए गए। इसी प्रकार डीसी गुणवंत, राकेश भारती को सीमांत जनपद के स्थान पर सुगम जनपदों में भेज दिया गया। चंद्रवीर सिंह वर्गीकरण सहायक पर 409, 420 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद चमोली भेषज संघ में नियम विरुद्ध सचिव बनाया गया, एसीपी तथा स्थायीकरण का लाभ दिया गया।

इसी प्रकार श्री परमार, श्रीमती पुष्पा बिष्ट, जीसी आर्या के नाम भी शामिल है। परमार को नियम विरुद्ध उत्तरकाशी भेषज संघ का सचिव बनाया गया। कनिष्ट लिपिक पुष्पा बिष्ट को बिना पद, बिना काम के ऊधमसिंहनगर/ नैनीताल भेजा गया जबकि जीसी आर्या जिन पर 14 लाख 50 हजार का गबन है पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर बिना पद स्वीकृत किये आउटसोर्स से 14 पद भर लिए गए।  जो विभाग को चूना लगाने जैसा ही है। एक ओर तो भेषज विकास इकाई के कतिपय कर्मचारियों को नियम विरुद्ध उनके मूल जनपदों में बिना पद स्वीकृति के नियुक्त किया गया। दूसरी ओर आउटसोर्स से नियुक्ति कर सरकार को लाखों का चूना लगाया।

जहां पहले यही कार्यवाही की गई थी वहीं एक बार फिर इसी तरह का कारनामा स्थानान्तरण नियमावली की अनदेखी करके किया गया है, जिसमें अपने चहेतों को बचाकर शेष को फिर ताश के पतों की तरह फेंट दिया गया है। राजीव कुमार की इस कार्यवाही पर नाम भले ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी का हो पर काम पूरा का पूरा उनका ही है। उन्होंने फिर अपने को सुरक्षित कर लिया है और इस स्थानान्तरण नियम की धज्जियां उड़ाता औरों का बलि का बकरा दिया है जिससे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में रोष है। इस बार 10 मई 2018 को यह सूची निकाली गई है जबकि इससे पहले सी-4, 16 अप्रैल 2018 को एक सूची जारी की गई थी जिसमें 27 लोगों  के नाम पात्रता सूची में शामिल थे। इसी प्रकार 10 मई को जारी सूची में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों समेत 39 लोगों के नाम शामिल थे। इस सूची में अधिकांश स्थानान्तरण नियम विरुद्ध किए गए थे।

 

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