
देहरादून। भगवान परशुराम की जयंती हवन पूजन के साथ मनाई गई। खुशीराम लाइब्रेरी प्रांगण में आयोजित इस जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्राह्मण समाज उत्थान परिषद के अध्यक्ष एसएन उपाध्याय जबकि संचालन महामंत्री डीएन शुक्ल ने किया। अपने संबोधन में अध्यक्ष एसएन उपाध्याय ने भगवान परशुराम की सार्थकता और उपादेयता पर प्रकाश डाला तथा कहा कि भगवान परशुराम ने युग के अनुसार व्यवस्था बनाकर आतताइयों का संहार किया, जो युग की मांग थी। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम क्षत्रिय विरोधी नहीं वरन् दुष्कर्म करने वालों का विरोध करते थे। अभिमान का विरोध करते थे। यही कारण है कि उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। महामंत्री पंडित डीएन शुक्ल ने इस दिवस की सार्थकता बताते हुए कहा कि भगवान परशुराम की जयंती के कारण ही यह दिन पूज्य नहीं है इसके और कई कारण है।
श्री शुक्ल ने कहा कि भविष्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सतयुग एवं त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था । भगवान विष्णु के 24 अवतारों में भगवान परशुराम, नर-नारायण एवं हयग्रीव आदि तीन अवतार अक्षय तृतीया के दिन ही धरा पर आए।
पंडित सुभाष मिश्र ने इस दिन के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि आज का दिन केवल भगवान परशुराम के कारण पूज्य नहीं है आज ही के दिन जैन के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव जी भगवान ने 13 महीने का कठीन निरंतर उपवास (बिना जल का तप) का पारणा (उपवास छोडना) इक्षु (गन्ने) के रस से किया था। और आज भी बहुत जैन भाई व बहने वही वर्षी तप करने के पश्चात आज उपवास छोड़ते है और नये उपवास लेते है। और भगवान को गन्ने के रस से अभिषेक किया जाता है। आज ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था। माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था। द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था। कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था। कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था। सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था। ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था।
अक्षय तृतीया (आखातीज) को अनंत-अक्षय-अक्षुण्ण फलदायक कहा जाता है। जो कभी क्षय नहीं होती उसे अक्षय कहते हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि इस दिन जिनका परिणय-संस्कार होता है उनका सौभाग्य अखंड रहता है। इस दिन महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए भी विशेष अनुष्ठान होता है जिससे अक्षय पुण्य मिलता हैं । प्रात: 11 बजे से प्रारंभ होकर यह हवन यज्ञ और प्रबोधन का कार्यक्रम दोपहर एक बजे तक चला, बाद में मिष्ठान वितरण का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर जो अन्य प्रमुख ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ लोग उपस्थित थे उनमें डीपी पांडेय, आरएस शुक्ला, पंडित सुभाष मिश्र, त्रिभुवन प्रसाद तिवारी, रामलखन मिश्र, बीडी शर्मा, मित्रानंद बड़ोनी, सुभाष जोशी, आरसी शर्मा, राम प्रताप मिश्र समेत दर्जनों प्रमुख लोग उपस्थित थे।


