बुद्ध पूर्णिमा 26 मई को यानि कल है। इसी दिन चंद्रग्रहण भी है, लेकिन यह उत्तर भारत में नहीं दिखाई देगा, ऐसे में इसका सूतककाल भी मान्य न होने के कारण लोग व्रत लेकर विधिवत पूजा कर सकेंगे। पूर्णिमा तिथि 25 मई मंगलवार की रात 8 बजकर 30 मिनट से 26 मई बुधवार की शाम 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। बुद्ध पूर्णिमा के दिन घाटों में स्नान का महत्व है। इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए ज्योतिषाचार्यों ने घरों पर ही गंगाजल से स्नान करने के साथ जरूरतमंदों को दान करने की अपील की है। आचार्य डॉ. सुशांत राज के मुताबिक, 26 मई को हिंदू मतावलंबी घरों में ही पितरों को तर्पण देने के साथ ही दीये जलाकर पर्व मना सकते हैं। बौद्ध समाज जहां इस दिन को भगवान बुद्ध की पूजा करते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि इस दिन भगवान बुद्ध ने अवतार लिया था, जो कि भगवान विष्णु के 9वें अवतार हैं। इसलिए बुद्ध पूर्णिमा न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कई लोग इस दिन चंद्रग्रहण को लेकर असमंजस में है, लेकिन चंद्रग्रहण उत्तर भारत में नहीं दिखाई देगा, ऐसे में इस दिन विधिवत व्रत और पूजा कर सकते हैं।दून बुद्धस्ट कमेटी की उपाध्यक्ष श्रृंग लुडिंग ने बताया कि बौद्ध कैलेंडर के मुताबिक 12 मई से 10 जून तक भगवान बुद्ध का जन्मदिवस मनाते हैं, इस पूरे महीने को दान पुण्य के लिए महत्व माना गया है। बुद्धा मंदिर और अन्य जगहों पर भव्य कार्यक्रम होते थे, लेकिन वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए इस बार घरों में ही दीये जलाकर भगवान की पूजा और कोरोना मुक्ति के लिए प्रार्थना होगी। भारतीय बौद्ध संघ के मीडिया प्रभारी आकाशदीप ने बताया कि जरूरतमंदों को मदद करने का कार्यक्रम जारी है।



