
देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण के शहीदों व विभिन्न आंदोलनकारियों के लिए राज्य में कोई भवन नहीं है। उत्तराखंड राज्य निर्माण परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने एक प्रेसवार्ता के माध्यम से लोगों के लिए भवन की मांग की है। इसके लिए उन्होंने उच्च न्यायालय उत्तराखंड के फैसले का भी हवाला दिया तथा कहा कि इस मामले पर राजभवन और राज्य सरकार को अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए। श्री जुगरान ने कहा कि 7 मार्च 2018 को उच्च न्यायालय में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को सरकारी सेवाओं में दिए जाने वाले 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा सीधी भर्ती से आंदोलनकारियों को सेवा में लेने का आदेश निरस्त कर दिया था। जिस पर प्रदेश सरकार पूरी तरह चुप है। यह फैसला आये हुए तीन महीने हो चुके हैं लेकिन सरकार अब तक मौन चुप्पी साधे हुए है।
रविंद्र जुगरान ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने आंदोलनकारियों के 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को राज्यपाल के अनुमोदन हेतु भेजा था, उसका भी अब तक कोई पता नहीं है। जिसके कारण राज्य सरकार की नीयत ठीक नहीं लग रही है। यदि राज्य सरकार ने इन मामलों पर अपना मौन न तोड़ा तो आंदोलनकारी इन दोनों मसलों को लेकर कड़ा कदम उठाएंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी



