पस्त कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती!

देहरादून। इन दिनों उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत फलों की दावतें दे रहे हैं, लेकिन उन्हीं के दल के लोग उन्हें इन दावतों पर पूरी तरह खींच रहे हैं। राज्य में करारी हार से पस्त कांग्रेस के सामने आज भी संगठन को मजबूत करने की जबर्दस्त चुनौती है, लेकिन वर्तमान पीसीसी चीफ अब तक ऐसा कर पाने में सक्षम नहीं रहे हैं। इसके कारण पार्टी में अंतर्कलह तेज हो गया है। वर्चस्व की जंग में ज्यादा रुचि ले रहे दिग्गज नेता एकदूसरे को पटखनी देने और निशाने पर लेने का मौका नहीं चूक रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मुखिया किशोर उपाध्याय ने गाहे-बगाहे हो रही अपनी उपेक्षा और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘दावतों’ को निशाने पर लेकर गुटीय खींचतान को सतह पर ला दिया है। हालांकि पूर्व पीसीसी चीफ किशोर उपाध्या कार्यक्रमों में भी शामिल होते हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री की खिंचाई करने से बाज भी नहीं आते। इसे संयोग कहें या कांग्रेस के पराभव के दिन कि अब कांग्रेस के दिग्गजों को एकता का पाठ नहीं पढ़ाया जा सका है।
पिछले दिनों पीसीसी चीफ ने नैनीताल के हेम आर्या को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से रहे हैं, को पार्टी में शामिल कराया था। इसका प्रभाव यह हुआ कि महिला कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सरिता आर्य नाराज हो गई और अब तक नाराज है। उन्होंने इस मामले की शिकायत आला कमान तक की है। ऐसा पार्टी के कुछ सूत्रों का कहना है। कांग्रेस के लिए राज्य में हार के बाद खुद को संभालना भारी पड़ रहा है। हार की टीस ने पार्टी के भीतर कभी एकदूसरे के करीबी समझे जाने वाले नेताओं को भी आमने-सामने ला खड़ा किया है। पार्टी में नए सिरे से वजूद की लड़ाई शुरू हो चुकी है। इस लड़ाई में शह और मात के खेल में बाजी भले ही किसी के भी हाथ लगे, लेकिन संगठन के मनोबल पर इसके असर को लेकर कार्यकर्ताओं के माथे पर बल जरूर पड़ गए हैं।

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